प्रणव कुमार दुबे
नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त (DCP) के समक्ष पत्रकार ऋचा पराशर द्वारा एक गंभीर आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा अन्य संबंधित लोगों के (FIR) दर्ज करने की पुरजोर मांग की गई है। यह पूरा घटनाक्रम बीते 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर आयोजित एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान घटी अप्रिय परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। महिला पत्रकार ने अपनी इस औपचारिक शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद से मीडिया जगत और राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, और उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस गंभीर मामले में त्वरित, निष्पक्ष तथा सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने का विशेष आग्रह किया है।
अपनी विस्तृत शिकायत में घटना का आंखों देखा हाल बयां करते हुए ऋचा पराशर ने बताया है कि जब वह 12 अक्टूबर के दिन सुप्रीम कोर्ट के निकट नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन की जमीनी हकीकत को कैमरे पर उतारने और निष्पक्ष रूप से रिपोर्ट करने के अपने पेशेवर कर्तव्य का निर्वहन कर रही थीं, ठीक उसी दौरान उनके साथ बेहद अवांछनीय तरीके से बदसलूकी और आक्रामक धक्का-मुक्की की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, उस वक्त वहां अचानक से एक अराजक और अनियंत्रित माहौल पैदा हो गया था, जिसके बीच उनका हाथ खींचा गया और भारी भीड़ के अनियंत्रित दबाव व धक्के के कारण वह संतुलन खोकर सीधे सीढ़ियों पर जा गिरीं। इस दुर्भाग्यपूर्ण और हिंसक घटनाक्रम के दौरान उन्हें शारीरिक रूप से गंभीर चोटें भी आईं और उनकी रिपोर्टिंग व कवरेज के लिए उपयोग किया जा रहा महंगा मोबाइल फोन भी जमीन पर गिरकर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे उनके पेशेवर कामकाज को भी भारी बाधा पहुंची।
इस पूरे मामले को लेकर पत्रकार ऋचा पराशर ने पुलिस अधिकारियों को दिए गए अपने आवेदन में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता करने वाले मीडियाकर्मियों के अधिकारों की सुरक्षा करना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है, इसलिए इस प्रकार की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि घटना स्थल पर मौजूद तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, वहां मौजूद अन्य पत्रकारों या मीडिया हाउस के कैमरों की वीडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का संकलन कर उनकी बारीकी से जांच की जाए, ताकि इस पूरी घटना की सच्चाई बेनकाब हो सके। इसके साथ ही, उन्होंने ड्यूटी के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ ऐसा अपमानजनक व आपराधिक बल का प्रयोग करने वाले सभी जिम्मेदार और दोषी व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित करने तथा उन पर कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई करने की जोरदार मांग की है।
तमाम आरोपों और शिकायतों के बावजूद यह स्पष्ट करना अनिवार्य है कि यह संपूर्ण विवरण और घटनाक्रम केवल महिला पत्रकार द्वारा नई दिल्ली जिला डीसीपी कार्यालय में दी गई आपराधिक शिकायत और उसमें लगाए गए प्राथमिक आरोपों पर ही पूरी तरह से आधारित है। इस संवेदनशील मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से शिकायत प्राप्त होने के उपरांत अब तक क्या आधिकारिक कदम उठाए गए हैं, इस पर किसी प्रकार की प्रारंभिक जांच शुरू की गई है या नहीं, और राहुल गांधी या अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है या मामले का कोई अन्य कानूनी निष्कर्ष निकला है—इन सभी बिंदुओं पर फिलहाल पुलिस प्रशासन या किसी भी अन्य आधिकारिक सूत्र की तरफ से कोई भी पुष्टि या आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
