प्रणव कुमार दुबे

उत्तर प्रदेश की राजनीति और संसदीय गलियारों से एक बहुत ही बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चालू सत्र के दौरान विपक्षी दल के सदस्यों के लगातार अभद्र व्यवहार, तीखी नारेबाजी और सदन की मर्यादाओं को तार-तार करने वाले रवैये से दुखी होकर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सतीश महाना ने बेहद भावुक और कड़ा रुख अपनाया है। सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी विधायकों द्वारा बार-बार अध्यक्ष की पीठ (स्पीकर की चेयर) का अनादर करने और कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करने से व्यथित होकर सतीश महाना ने भरे सदन में पद छोड़ने तक की सीधी चेतावनी दे डाली। उन्होंने बेहद आहत और तल्ख लहजे में सभी सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, “यदि सदन की मर्यादा ही कायम नहीं रह सकती, तो मुझे यह गंभीरता से सोचना पड़ेगा कि क्या मैं इस सर्वोच्च कुर्सी के योग्य हूं या नहीं… मुझे अपने इस पद पर बने रहने पर विचार करना होगा।” स्पीकर के इस अप्रत्याशित और सख्त बयान के सामने आते ही पूरे सदन में अचानक गहरा सन्नाटा छा गया और सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के तमाम नेताओं के चेहरे पर असहजता साफ देखी जाने लगी।

सदन की कार्यवाही के दौरान अपनी पीड़ा साझा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जब से उन्होंने इस पीठ का उत्तरदायित्व संभाला है, उनका हमेशा से यही प्रयास रहा है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निष्पक्षता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विधायी परंपराओं का शत-प्रतिशत पालन किया जाए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वह सत्ता पक्ष की तरह ही विपक्षी सदस्यों को भी जनता से जुड़े जनहित के मुद्दों को उठाने का पूरा, न्यायसंगत और पर्याप्त अवसर प्रदान करते हैं। इसके बावजूद, जिस तरह से पीठ के प्रति अनादर दर्शाया जा रहा है, वेल (सदन के बीचों-बीच) में आकर हंगामा किया जा रहा है और संसदीय भाषा की मर्यादा तोड़ी जा रही है, वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के गौरवशाली इतिहास पर एक गहरा धब्बा है। सतीश महाना ने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि यदि सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग नहीं मिलेगा और अध्यक्षीय पीठ के सम्मान को चोट पहुँचाई जाएगी, तो उनके लिए इस लोकतांत्रिक मंदिर के सर्वोच्च पद पर आसीन रहना निरर्थक और आत्मा के विरुद्ध हो जाता है।

स्पीकर सतीश महाना की इस भावनात्मक चेतावनी और सख्त रुख के बाद सदन का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से बदल गया। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं ने तुरंत अपनी जगह से खड़े होकर अध्यक्ष महोदय के प्रति अपना पूर्ण समर्थन और अटूट विश्वास व्यक्त किया, वहीं हंगामे में शामिल विपक्ष के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए माहौल को शांत करने का प्रयास किया। संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर माना जा रहा है जब अपनी अत्यधिक सौम्यता, धैर्य और कुशल संचालन शैली के लिए पहचाने जाने वाले सतीश महाना ने अपना इतना गहरा दर्द और कड़ा असंतोष सार्वजनिक तौर पर प्रकट किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है और यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या विपक्षी दल अपने इस रवैये में सुधार लाएंगे या फिर यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ेगा।

By नवप्रभा टाइम्स

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