नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग द्वारा ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझना’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्त्व पर विचार साझा किए। कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझना तथा शिक्षण संस्थानों में सहयोगपूर्ण वातावरण विकसित करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया रिपोर्ट के अनुसार देशभर में लगभग 13,892 विद्यार्थियों की आत्महत्या से मृत्यु दर्ज की गई। इन आँकड़ों के संदर्भ में कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता, समय पर सहायता और प्रभावी सहयोग व्यवस्था की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

आयोजन में हिन्दी विभाग के प्रभारी प्रो. बिजेंद्र कुमार, मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी प्रो. अनीता श्रीवास्तव तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. नवीन कुमार की उपस्थिति रही। विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने अनुभवों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। प्रसार भारती बोर्ड के सदस्य राजीव भारद्वाज ने अपने 36 वर्षों से अधिक के मानव संसाधन एवं संगठनात्मक विकास के अनुभव के आधार पर निराशा, हताशा और बदलाव से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाले परिवर्तनों को स्वीकार करना, अनुशासन बनाए रखना और कार्य तथा कौशल के बीच अंतर को समझना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को कार्य और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की भी सलाह दी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा नीति एवं कौशल विकास के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ संजीव रॉय ने अपने अनुभवों के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के परस्पर संबंध को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि कभी-कभी उदासी या निराशा महसूस करना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें उचित तरीके से व्यक्त करना महत्त्वपूर्ण है। हार्वर्ड अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने सकारात्मक मानवीय संबंधों की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

एम्स, नई दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ. यश चंद्र सिंह ने तनाव, मानसिक कष्ट और संकट की अवधारणाओं को सरल ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के व्यवहार और पढ़ाई में होने वाले बदलाव मानसिक परेशानी के संकेत हो सकते है। ऐसे समय में संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनना और उचित सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने ‘नोटिस, आस्क, लिसन, लिंक’ मॉडल के अंतर्गत किसी व्यक्ति की स्थिति पर ध्यान देने, उससे बात करने, उसकी बात सुनने और उसे आवश्यक सहायता से जोड़ने की प्रक्रिया समझाई। पाँच मिनट के संवाद और फिल्मों के उदाहरणों के माध्यम से दी गई उनकी प्रस्तुति को प्रतिभागियों ने सराहा।

यातायात एडिशनल पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार गुप्ता ने युवावस्था को जीवन का महत्त्वपूर्ण चरण बताते हुए विद्यार्थियों को दबाव का सामना धैर्य और समझदारी से करने की प्रेरणा दी। उन्होंने भगवद्गीता के संदेश ‘कर्म तुम्हारे हाथ में है, फल नहीं’ का उल्लेख करते हुए प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। स्टीव जॉब्स के जीवन से उदाहरण देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करने और अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

आईपीएस अधिकारी, लेखक एवं शिक्षाविद् महेश कुमार बरनवाल ने सफलता के लिए कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास को आवश्यक बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं को पहचानने तथा उनमें निरंतर सुधार करने की सलाह दी। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीखना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर दूसरों से सहायता लेना भी समझदारी का परिचायक है।

प्रो. बिजेंद्र कुमार के मार्गदर्शन और प्रो. अनीता श्रीवास्तव के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का संयोजन डॉ. नवीन कुमार ने किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। विभिन्न विशेषज्ञों के विचारों ने मानसिक स्वास्थ्य को केवल व्यक्तिगत विषय न मानकर शैक्षणिक संस्थानों और समाज की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन डॉ. खुशबू द्वारा किया गया। इस दौरान अतिथियों, वक्ताओं, महाविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यशाला का संदेश स्पष्ट मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें, जरूरतमंद व्यक्ति की बात ध्यान से सुनें और उसे उचित सहयोग उपलब्ध कराएँ।

By नवप्रभा टाइम्स

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