प्रणव कुमार दुबे
रांची: देश के जाने-माने टीवी एंकर और वरिष्ठ पत्रकार अमन चोपड़ा की मुश्किलें कानूनी पचड़े में फंसने के बाद काफी बढ़ गई है। झारखंड की राजधानी रांची में पुलिस ने उनके खिलाफ अस्पताल प्रशासन की लिखित शिकायत के आधार पर एक गंभीर प्राथमिकी दर्ज की है। पूरा विवाद रांची के प्रतिष्ठित सदर अस्पताल का है, जहां अनधिकृत रूप से प्रवेश करने, संवेदनशील मेडिकल वार्ड के सख्त नियमों को तोड़ने और प्रशासनिक अनुमति के बिना वीडियो रिकॉर्डिंग करने के गंभीर आरोप एंकर पर लगाए गए है। इस पूरी घटना के बाद से झारखंड की सियासत के साथ-साथ मीडिया गलियारों में भी बयानबाजी और चर्चाओं का दौर तेजी से गर्म हो गया है।
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम राज्य में जारी छात्र आंदोलन और युवाओं के प्रदर्शन से सीधा जुड़ा हुआ है। झारखंड में हाल ही में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में राज्यभर के परीक्षार्थी व युवा कई दिनों से सडकों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन और अनशन कर रहे है। इसी आंदोलन के दौरान अनशन पर बैठा एक छात्र नेता जब शारीरिक रूप से अत्यंत कमजोर हो गया और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, तो उसे आनन-फानन में रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। छात्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने उसे अस्पताल के हाई डिपेंडेंसी यूनिट में रखा था, जहां सिर्फ बेहद जरूरी स्थिति में ही किसी बाहरी व्यक्ति को जाने की अनुमति होती है।
आरोप है कि पत्रकार अमन चोपड़ा अपनी टीम के साथ उक्त छात्र का इंटरव्यू लेने और अस्पताल के भीतर की स्थिति को कवर करने पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमन चोपड़ा ने बिना किसी आधिकारिक अनुमति, बिना पास और बिना मेडिकल प्रोटोकॉल (संक्रमण नियंत्रण के नियमों) का पालन किए सीधे अति-संवेदनशील एचडीयू/आईसीयू वार्ड में प्रवेश कर लिया। वहां उन्होंने न सिर्फ मरीज से बातचीत करते हुए अपने कैमरे से रिकॉर्डिंग शुरू की, बल्कि वार्ड के भीतर की अन्य गतिविधियों को भी रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि गंभीर मरीजों के इलाज में इस तरह अचानक मीडिया का प्रवेश और कैमरे चलाना न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा संक्रमण का खतरा पैदा करता है, बल्कि यह उनकी निजता और सुरक्षा मानकों का भी सीधा उल्लंघन है।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और प्रशासनिक टीम की शिकायत के बाद रांची पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अमन चोपड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत आधिकारिक FIR दर्ज कर ली। एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एंकर को पूछताछ के लिए अपने पास बुलाया। करीब दो घंटे तक चलीं लंबी पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारियों ने घटना के संबंध में उनसे विस्तार से सवाल-जवाब किए और इसके बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी की एक प्रति सौंप दी। पुलिसि या प्रशासन का कहना है कि नियम कानून सभी के लिए समान हैं और किसी भी सार्वजनिक अथवा संवेदनशील सरकारी संस्थान की सुरक्षा व चिकित्सा व्यवस्था में खलल डालने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकार अमन चोपड़ा और उनके समर्थकों ने पुलिस की इस कार्रवाई को राज्य सरकार का राजनीतिक प्रतिशोध और स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा प्रहार करार दिया है। अमन चोपड़ा का कहना है कि वे केवल झारखंड के बेरोजगार और आक्रोशित युवाओं की जायज मांग और सच को देश के सामने ला रहे थे, जिससे घबराकर राज्य सरकार अपनी पुलिस का इस्तेमाल कर सच की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने साफ किया कि एक जिम्मेदार पत्रकार के नाते वे जनता और युवाओं के मुद्दों को आगे भी उठाते रहेंगे। फिलहाल, पुलिस मामले की तकनीकी जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस पर कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
