प्रणव कुमार दुबे
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का गुस्सा अब एक विराट जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। राजधानी रांची की सड़कें सोमवार को उस समय ऐतिहासिक संघर्ष की गवाह बनीं, जब राज्य के कोने-कोने से पहुंचे हजारों आक्रोशित युवाओं ने हुंकार भरते हुए विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला। ‘हक दो या गद्दी छोड़ो’ और अपने हक के नारों से गूंजती सड़कों पर छात्रों के सामने प्रशासन के सारे इंतज़ाम पस्त नज़र आए। पुलिस बल द्वारा लगाए गए कई स्तरों के सुरक्षा चक्रव्यूह, कंटीले तारों की मजबूत बैरिकेडिंग और भारी संख्या में तैनात जवानों की मुस्तैदी को धता बताते हुए युवाओं का यह उग्र सैलाब सुरक्षा के कई घेरों को पार कर विधानसभा की ओर बढ़ गया।
विधानसभा मार्ग पर माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया जब मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछारें कीं और एक के बाद एक कई आंसू गैस के गोले दागे। लेकिन छात्रों का बुलंद हौसला इन कड़े उपायों से भी नहीं डगमगाया; धुएं और पानी की परवाह किए बिना आक्रोशित छात्रों ने पुलिस के अंतिम सुरक्षा घेरे को उखाड़ फेंका और भारी-भरकम लोहे की बैरिकेडिंग को हाथों में उठाकर पीछे धकेल दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक अभूतपूर्व दृश्य यह भी देखने को मिला कि सीधी झड़प से बचते हुए छात्र केवल अपनी मांग को सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने के लिए आगे बढ़ते रहे, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन भी स्थिति को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग से बचता दिखा।
ग्राउंड जीरो पर मौजूद संवाददाताओं और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह आंदोलन अब एक ऐसे मुकाम (डेडलॉक) पर आ गया है, जहाँ केवल औपचारिक आश्वासन या टालमटोल से काम नहीं चलने वाला। परीक्षा व्यवस्था में शुचिता, धांधली की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े छात्रों का साफ कहना है कि उनका यह प्रदर्शन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक सरकार सीधे टेबल पर आकर पारदर्शी फैसला नहीं लेती। अब पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की चौखट पर है; अगर शासन ने तुरंत संज्ञान लेकर इस गतिरोध को खत्म करने के लिए ठोस और लिखित पहल नहीं की, तो युवाओं का यह उबलता असंतोष पूरे राज्य की व्यवस्था को ठप करने वाले एक बड़े आंदोलन में तब्दील हो सकता है।
