यश पांडेय
स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर देशवासियों के दिलों में देशप्रेम की एक नई तरंग पैदा करता है। यह दिन न केवल तिरंगे की आन-बान-शान का जश्न मनाने का है, बल्कि उस अमूल्य स्वतंत्रता का स्मरण करने का भी है जो हमें हमारे पूर्वजों के अतुलनीय संघर्ष से विरासत में मिली है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में इस राष्ट्रीय पर्व को अत्यंत गरिमा, उत्साह और गौरवशाली इतिहास के साथ मनाया गया। ध्वजारोहण के साथ ही पूरा परिसर भारत माता के जयकारों और राष्ट्रभक्ति के गीतों से गुंजायमान हो उठा, जहां पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने तिरंगे को सलामी दी।
इंदिरा भवन में आयोजित इस भव्य समारोह के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस विशेष क्षण में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) श्री राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ध्वजारोहण के बाद सभी नेताओं ने एकजुट होकर राष्ट्रगान गाया और देश को एकजुट रखने तथा संविधान की रक्षा करने का संकल्प लिया। शीर्ष नेताओं की इस उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा और देश के सामने मौजूद चुनौतियों का मजबूती से सामना करने का संदेश दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक संवेदनशील और गंभीर राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज का ऐतिहासिक दिन सिर्फ अतीत की गौरवगाथाओं को दोहराने या स्वाधीनता संग्राम को याद करने का नहीं है, बल्कि यह एक आत्ममंथन करने का भी दिन है। उन्होंने देशवासियों से यह सवाल पूछने का आह्वान किया कि जिस भारत का सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था—जहां हर नागरिक को समानता, न्याय और अभिव्यक्ति की आजादी मिले—आज हम उस लक्ष्य के कितने करीब पहुंचे हैं। खरगे ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र और संविधान की नींव को मजबूत बनाए रखना ही वास्तविक अर्थों में आजादी को संरक्षित करना है।
पार्टी के योगदान और बलिदान का जिक्र करते हुए खरगे ने इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी का अपना एक 141 साल का सुदीर्घ और गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसमें से 62 वर्षों तक पार्टी ने क्रूर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ी। इस लंबे और कठिन संघर्ष के दौरान लाखों भारतीयों ने अपने जीवन का बलिदान दिया, अमानवीय यातनाएं सहीं और अपना सब कुछ देश पर न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि शहीदों के इस त्याग को कभी भुलाया नहीं जा सकता और आज का यह दिन उन सभी ज्ञात और अज्ञात महापुरुषों को नमन करने तथा उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लेने का है।
