नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सेंट ग्लोबल मॉरल स्कूल में महर्षि वेदव्यास को समर्पित एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे विद्यालय के असेंबली हॉल में 200 से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक एवं विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। यमुना विहार क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र, अभिभावक तथा शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से इस आयोजन में सम्मिलित हुए। आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति के अद्भुत समन्वय ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के प्रांत मंत्री राकेश कुमार ने विद्यालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया। उन्होंने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा नैतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाला पथप्रदर्शक होता है। महर्षि वेदव्यास इसी गुरु परंपरा के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। कार्यक्रम के मंच संचालक के रूप में योगेश शर्मा ने विद्यार्थियों को महर्षि वेदव्यास के जीवन, वंश परंपरा तथा उनके अप्रतिम साहित्यिक अवदान से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास ने अठारह महापुराणों की रचना की, महाभारत का सृजन किया, श्रीमद्भगवद्गीता को मानवता तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया तथा विशाल वैदिक ज्ञान को चार वेदों में व्यवस्थित कर भारतीय संस्कृति को अमूल्य धरोहर प्रदान की।

इसके पश्चात इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती, प्रांत मंत्री, राकेश कुमार ने प्रेरक कथाओं एवं सहज उदाहरणों के माध्यम से महर्षि वेदव्यास के जीवन-दर्शन और उनके ग्रंथों की महत्ता को अत्यंत रोचक शैली में प्रस्तुत किया। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता करते हुए अनेक जिज्ञासाएँ भी व्यक्त की।
अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों से यक्ष–युधिष्ठिर संवाद का स्वाध्याय करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह संवाद सत्य, धर्म, विवेक, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों का अनुपम स्रोत है। भविष्य में इस विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित करने की भी घोषणा की गई।
विद्यालय के शिक्षकों ने विश्वास दिलाया कि वे विद्यार्थियों को सरल भाषा में इस प्रसंग का अध्ययन कराएँगे।
