नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार
कहते हैं कि एक बेटी के लिए उसका पिता पूरी दुनिया होता है और पिता के लिए उसकी बेटी उसके कलेजे का टुकड़ा लेकिन बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पवित्र सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है एक बेबस पिता को अपनी ही जीती-जागती, हंसती-खेलती बेटी का पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना पड़ा जिसने भी इस मंजर को देखा और सुना, उसकी आंखें नम हो गईं और कलेजा मुंह को आ गयाइलाके के लोग हैरान है कि आखिर एक पिता के दिल पर दुखों का कैसा पहाड़ टूटा कि उसे कानूनन जिंदा, लेकिन अपने लिए ‘मर चुकी’ बेटी की अर्थी सजानी पड़ी
रातों की नींद उड़ी, जब अचानक लापता हुई ‘घर की रौनक’ यह पूरी दर्दनाक कहानी कटिहार जिले के रौतारा थाना क्षेत्र की है। कुछ समय पहले तक इस घर में सब कुछ सामान्य था ,लेकिन अचानक एक दिन घर की लाडली बेटी बिना बताए कहीं चली गई ,बेटी के अचानक गायब होने से पूरे परिवार पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा ,माता-पिता ने लोक-लाज की परवाह किए बिना दिन-रात एक करके उसे हर संभावित जगह पर ढूंढा ,सगे-संबंधियों के चक्कर काटे, रोए-बिलखे, लेकिन जब उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिला, तो थक-हारकर बदहवास पिता ने रौतारा थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई,पुलिस ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तेजी से जांच शुरू की,
प्यार की खातिर मर्यादा की दीवारें ढही, प्रेमी संग रचाई शादी पुलिस की तफ्तीश रंग लाई और लापता युवती को सकुशल बरामद कर लिया गया लेकिन इसके साथ ही जो सच सामने आया, उसने परिवार के पैरों तले से जमीन खिसका दी। युवती ने अपने परिवार की मर्जी और सामाजिक मर्यादाओं को दरकिनार करते हुए अपने प्रेमी के साथ भागकर प्रेम विवाह (लव मैरिज) कर लिया था माता-पिता का दिल इस बात से जरूर दुखा था कि बेटी ने उनकी परवरिश पर एक बाहरी लड़के को तरजीह दी, फिर भी अपनी औलाद की सूरत देखने और उसे वापस गले लगाने की उम्मीद में वे अदालत पहुंचे उन्हें क्या पता था कि वहां उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द उनका इंतजार कर रहा है
मैं इन्हें नहीं जानती…कोर्ट रूम में बेटी के इन चार शब्दों ने कर दिया वज्रपात
पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए युवती को न्यायालय में पेश किया अदालत कक्ष में एक तरफ वह बेटी खड़ी थी जिसे माता-पिता ने अपनी उंगली पकड़कर चलना सिखाया था, और दूसरी तरफ बूढ़े माता-पिता आसू भरी आंखों से अपनी लाडली को निहार रहे थे लेकिन जैसे ही कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई, युवती ने जो कहा, उसने पूरे कोर्ट रूम को सन्न कर दियापरिजनों का आरोप है कि जब अदालत में युवती से उसके माता-पिता की तरफ इशारा करके पूछा गया, तो उसने बेहद ठंडे और अजनबी लहजे में कहा”मैं इन लोगों को नहीं जानती, ये मेरे माता-पिता नहीं है “जिस औलाद की एक छोटी सी चोट पर हमारा दिल दहल जाता था, उसने भरी अदालत में हमें अजनबी बना दिया हमारे सालों के लाड़-प्यार, त्याग और खून-पसीने की कमाई को उसने एक पल में मिट्टी में मिला दिया उस अदालत में हमारी बेटी नहीं, बल्कि हमारे माता-पिता होने का वजूद मर गया।
रोते हुए पीड़ित पिता के करुण शब्द समाज के सामने निकाली शव यात्रा; पुतला जलाकर किया अंतिम संस्कार
अपनी ही पैदा की हुई संतान के मुंह से यह घोर अपमानजनक शब्द सुनकर माता-पिता वहीं टूटकर बिखर गए वह सदमा ऐसा था जिसे सह पाना किसी भी माता-पिता के लिए मुमकिन नहीं था घर लौटने पर पूरा परिवार भावनात्मक रूप से पूरी तरह मृत हो चुका था इस घोर सामाजिक आघात और बेइज्जती से आहत होकर पिता ने एक अत्यंत कठोर और ऐतिहासिक फैसला लिया उन्होंने समाज और ग्रामीणों की एक बैठक बुलाई और भरे गले से ऐलान किया कि जो बेटी अपने माता-पिता को भूल गई, वह परिवार के लिए भी अब इस दुनिया में नहीं रही।
इसके बाद पूरे गांव की मौजूदगी में हिंदू सनातन रीति-रिवाज के अनुसार बकायदा बेटी का एक पुतला (कुश का पुतला) बनाया गया उसे कफन ओढ़ाया गया, अर्थी सजाई गई और कंधा देकर श्मशान घाट ले जाया गया। वहां मुखाग्नि देकर उसका अंतिम संस्कार किया गया इतना ही नहीं, पिता ने सर मुंडवाकर अपनी जिंदा बेटी का दशगात्र और श्राद्ध कर्म कर पिंडदान भी कर दिया
इस घटना ने पूरे बिहार में आधुनिक रिश्तों की कड़वी हकीकत, माता-पिता के दर्द और नई पीढ़ी के बदलते तौर-तरीकों पर एक गंभीर और बेहद भावुक बहस छेड़ दी है हर कोई यही कह रहा है कि काश किसी भी माता-पिता को अपनी जिंदगी में ऐसा बदनसीब दिन न देखना पड़े।
