नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार दुबे
बिहार के सीतामढी : नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को धरातल पर उतारते हुए और भाषाई विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय जवाहरनगर, सीतामढी में आज से सात दिवसीय ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर’ का हर्षोल्लास के साथ आगाज हुआ। इस विशेष शिविर का विधिवत उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यालय के प्राचार्य श्री पंकज अग्रवाल एवं विशिष्ट अतिथि प्रधानाध्यापक श्री आर. के. रंजन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान विद्यालय का वातावरण नई ऊर्जा से सराबोर दिखा, जहाँ प्राचार्य श्री अग्रवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि संस्कृति का वाहक और आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने वाला सबसे सशक्त सेतु है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में प्रभावी संवाद कौशल ही सफलता की कुंजी है और विभिन्न भारतीय भाषाओं का ज्ञान छात्रों के व्यक्तित्व को एक नई पहचान प्रदान करेगा।
इस सात दिवसीय कार्यशाला की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए प्रधानाध्यापक श्री आर. के. रंजन ने बताया कि यह शिविर पूरी तरह से छात्रों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है, जिसमें मुख्य रूप से मैथिली और उर्दू जैसी समृद्ध भाषाओं के अध्यापन पर जोर दिया जाएगा। शिविर को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए इसे अत्यंत मनोरंजक और रचनात्मक बनाया गया है। शिविर के दौरान छात्र नुक्कड़ नाटक, पारंपरिक लोकगीत, संगीत, प्रश्नोत्तरी (क्विज) और वाद-विवाद जैसी विविध गतिविधियों में भाग लेंगे। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहाँ वे अपनी हिचक दूर कर सकें और अपनी अभिव्यक्ति को प्रभावी बना सकें। प्रशिक्षक के रूप में विद्यालय के संगीत शिक्षक श्री संजय कुमार, श्रीमती रिजवाना एवं श्री पवन कुमार झा अपनी विशेषज्ञता से बच्चों को इन भाषाओं के व्याकरण, उच्चारण और कलात्मक पक्षों से अवगत कराएंगे।
शिविर के प्रति छात्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और विद्यालय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सीखने की यह प्रक्रिया पूरी तरह से सक्रिय भागीदारी पर आधारित हो। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य ने घोषणा की कि इस कार्यशाला को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को उनकी मेहनत और लगन के प्रोत्साहन स्वरूप औपचारिक प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। यह शिविर न केवल छात्रों को नई भाषाएं सीखने में मदद करेगा, बल्कि उनके भीतर छिपी सांस्कृतिक प्रतिभा को भी निखारने का कार्य करेगा, जिससे विद्यालय के शैक्षिक स्तर में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
