‘माँ तेरे लिए…’ संस्कार महोत्सव, गोपालगंज गौरव सम्मान एवं बिहार गौरव सम्मान समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न

प्रणव कुमार अभय

मातृत्व, संस्कार, संस्कृति और समाज के प्रति समर्पण की भावना को समर्पित भव्य आयोजन ‘माँ तेरे लिए… संस्कार महोत्सव’, ‘गोपालगंज गौरव सम्मान’ एवं ‘बिहार गौरव सम्मान’ समारोह का आयोजन कृष्णलता फाउंडेशन एवं ओशनिक माइंड स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में देव पार्टी जोन होटल एंड मैरेज हॉल, गोपालगंज में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, प्रशासन, प्रौद्योगिकी, लोकसंस्कृति एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों का सम्मान कर यह समारोह प्रतिभा, परंपरा और प्रेरणा का एक अनुपम संगम बन गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर श्री बलिराम सिंह, श्री अरविन्द सिंह, श्री नीलेश त्रिपाठी, डॉ. मिथिलेश सिंह, प्रो. शारदिंदु तिवारी, श्री प्रभाकर कुमार मिश्रा, श्रीमती संगीता तिवारी, श्री अनिल सिंह तथा डॉ. पी.के. मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारम्भ किया। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि “सम्मान किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, समर्पण और समाज के प्रति योगदान का अभिनंदन होता है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करते हैं।”

गोपालगंज के पत्रकार संजय कुमार अभय को सम्मान देती पीटीआई के इनपुट हेड संगीता तिवारी।

 

समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करने वाली विभूतियों को गोपालगंज गौरव सम्मान एवं बिहार गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया।

राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सुश्री संगीता तिवारी, जनहित पत्रकारिता, लेखन एवं सामाजिक सरोकारों की निर्भीक रिपोर्टिंग हेतु श्री प्रभाकर कुमार मिश्रा तथा संस्कृत साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक प्रोफेसर शारदिंदु तिवारी को गोपालगंज गौरव सम्मान प्रदान किया गया। वहीं वैश्विक तकनीकी नवाचार एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए श्री मदनजीत कुमार सिंह एवं श्री तरुणेश कुमार को बिहार गौरव सम्मान से विभूषित किया गया। बिहार की लोकसंस्कृति, मैथिली-भोजपुरी लोकधारा तथा छठ गीतों की परंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान हेतु पंडित हृदयनारायण झा को बिहार गौरव सम्मान (विशेष श्रेणी) प्रदान किया गया। सम्मानित अतिथियों ने अपने संबोधन में युवाओं को परिश्रम, अनुशासन, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सम्मान व्यक्ति को नई ऊर्जा प्रदान करता है तथा समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत बनाता है। मुख्य अतिथि श्री अरविन्द सिंह ने कहा कि “शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। माँ बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जिसके स्नेह, त्याग और मार्गदर्शन से जीवन की दिशा निर्धारित होती है।” उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

बनारस यूनिवर्सिटी संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर शारदिन्दु तिवारी को सम्मानित करते मुख्य अतिथि अरविन्द सिंह और कृष्णलता फाउंडेशन के अध्यक्ष दिग्विजय नारायण सिंह।

 

विशिष्ट अतिथि एवं संस्कृत विद्वान प्रोफेसर शारदिंदु तिवारी ने कहा कि “भारतीय संस्कृति में ‘मातृदेवो भवः’ केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। शिक्षा तभी सार्थक है जब वह विनम्रता, सेवा, सम्मान और मानवीय संवेदनाओं का विकास करे।”कार्यक्रम का सांस्कृतिक सत्र भावनाओं, संस्कारों और रचनात्मकता से ओत-प्रोत रहा। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘ले जाओ दौलत मैं माँ रख लेता हूँ’ गीत ने मातृ प्रेम की अनुपम महिमा को जीवंत कर दिया। नन्हे-मुन्ने बच्चों की प्रस्तुति ‘माँ के अनेक रूप’ ने मातृत्व के त्याग, वात्सल्य और ममता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंचित किया।‘कौन सा मंत्र जपूँ मैं’, ‘चंदा रे’ एवं ‘बुरे काम का बुरा नतीजा’ जैसी प्रस्तुतियों ने मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का संदेश भी दिया।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘समुद्र मंथन : विषपान’ नाट्य प्रस्तुति रही, जिसमें भगवान शिव के लोककल्याण हेतु विषपान के प्रसंग को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। वहीं ‘शिव तांडव’ की ओजस्वी प्रस्तुति ने पूरे सभागार को शिवमय बना दिया और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

 

 

उत्तर प्रदेश डिग्री कालेज संघ के अध्यक्ष डॉ मिथिलेश सिंह को सम्मानित करते मुख्य अतिथि अरविन्द सिंह।

 

इसके अतिरिक्त ‘माँ : द लाइट ऑफ लाइफ’, ‘मदर्स लव : द मैजिक ब्लैंकेट’ तथा ‘आईना समाज का’ जैसी नाट्य प्रस्तुतियों ने मातृत्व, संस्कार और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश दिया।आद्या नारायण सिंह द्वारा प्रस्तुत ‘ऐसी होती है माँ’ तथा शाम्भवी सिंह की प्रभावशाली प्रस्तुति ‘डगर है मुश्किल’ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं रव्यांश चौबे एवं प्रतीक श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘माँ-बाप से बढ़कर जग में’, ‘साँसों की माला पे’, ‘राम के गुणगान कीजिए’, ‘जग में माई बिना केहू’, ‘मन से बड़ा बहुरूपिया न कोई’ तथा ‘जब आँख खुली तब’ जैसे गीतों ने पूरे वातावरण को भक्ति, संवेदना और भारतीय संस्कारों के रंगों से सराबोर कर दिया।

गोपालगंज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ सुमन को सम्मानित करते मुख्य अतिथि श्री अरविन्द सिंह।

समारोह के समापन सत्र में विद्यालय के निदेशक श्री दिग्विजय नारायण सिंह ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, सम्मानित विभूतियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा—

“मातृशक्ति और भारतीय संस्कारों को समर्पित ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। समाज तभी आगे बढ़ता है जब वह अपने प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों का सम्मान करना सीखता है। गोपालगंज गौरव सम्मान और बिहार गौरव सम्मान इसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है।”कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अभिभावकों एवं नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। पूरे आयोजन के दौरान सभागार में गौरव, आत्मीयता, संस्कार और प्रेरणा का अद्भुत वातावरण बना रहा।

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