डॉ सत्य प्रकाश तिवारी
मौसम विज्ञान केंद्र ने बिहार के मौसम को लेकर एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके बाद पूरे राज्य में प्रशासनिक महकमा अलर्ट मोड पर आ गया है तथा मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी 17 जून से लेकर 20 जून तक बिहार के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदलने वाला है, इस चार दिवसीय अवधि के दौरान राज्य के अधिकांश जिलों में धूलभरी तेज हवाएं चलने, आसमान में घने बादल छाने, गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने और भारी वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने की प्रबल आशंका जताई गई है ,मौसम की इस अचानक बदलती करवट और गंभीर स्थिति को देखते हुए विभाग ने संवेदनशीलता के आधार पर विभिन्न जिलों के लिए ‘येलो’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी कर दिया है, जो यह दर्शाता है कि आने वाले दिन राज्यवासियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
मौसम विभाग की इस गंभीर चेतावनी के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने भी कमर कस ली है और लोगों से बेहद सतर्क रहने की अपील की है,विभाग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि खराब मौसम के दौरान लोग बेवजह अपने घरों से बाहर न निकलें और यदि वे रास्ते में हों, तो जल्द से जल्द किसी पक्के और सुरक्षित मकान में शरण ले लें और खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों, पशुपालकों और खुले क्षेत्रों या निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों को विशेष सावधानी बरतने की सख्त हिदायत दी गई है, क्योंकि खुले आसमान के नीचे वज्रपात की चपेट में आने का खतरा सबसे अधिक होता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिजली के खंभों, ऊंचे पेड़ों और जलजमाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें, ताकि मौसम के इस प्रकोप के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या जान-माल के नुकसान को पूरी तरह से टाला जा सके।
इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों और आपातकालीन सेवाओं को चौबीसों घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके या अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है और नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) के माध्यम से पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा मौसमविदों का कहना है कि वायुमंडल में हो रहे अचानक बदलावों और नमी के तेजी से बढ़ने के कारण यह स्थिति पैदा हो रही है, जो अगले कुछ दिनों तक जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैऔर ऐसे में जनता से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है, ताकि इस प्राकृतिक संकट का डटकर सामना किया जा सके।
