डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी
वाराणसी: देवाधिदेव महादेव के अत्यंत प्रिय एवं पावन सावन मास के दूसरे सोमवार को पूरी धर्मनगरी काशी अलौकिक शिवभक्ति के आनंद में सराबोर नजर आ रही है। तड़के भोर में अत्यंत भव्य मंगला आरती के दिव्य अनुष्ठान के संपन्न होते ही जैसे ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए खोले गए, पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’ और ‘जय बाबा विश्वनाथ’ के गगनभेदी जयकारों से दसों दिशाओं में गूंज उठा। दूर-दराज से पैदल यात्रा करके आए कांवड़ियों और कोने-कोने से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के चेहरे पर थकावट का नामोनिशान तक नहीं था और हर कोई बस अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर दिखा। आस्था और समर्पण का आलम यह रहा कि सुबह सात बजे तक ही 1 लाख 35 हजार से भी अधिक भक्त बाबा दरबार में हाजिरी लगाकर जलाभिषेक कर चुके थे, जबकि श्रद्धालुओं के आने का अनवरत सिलसिला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। मंदिर प्रशासन और न्यास की ओर से कतार में लगे भावुक भक्तों पर गुलाब की फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा कर उनका भव्य, आत्मीय और स्नेहपूर्ण स्वागत किया गया।
श्रद्धालुओं के इस अभूतपूर्व जनसैलाब को व्यवस्थित और सुरक्षित ढंग से दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रशासन और जिला पुलिस प्रशासन की ओर से अत्यंत व्यापक और चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। दर्शन मार्ग पर अत्यधिक दबाव और भगदड़ जैसी स्थिति को रोकने के लिए पूरे परिसर और पहुंच मार्गों पर जिग-जैग बैरिकेडिंग की मजबूत व्यवस्था की गई है, जिससे कतारें निरंतर गतिमान बनी रहें। इसके साथ ही भीषण गर्मी, उमस और धूप से भक्तों के बचाव के लिए विशाल जर्मन हैंगर और शेड लगाए गए हैं, वहीं कतारों में खड़े श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह शीतल पेयजल, ओआरएस घोल और तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए सचल मेडिकल कैंपों की तैनाती की गई है। पूरे धाम क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल, एटीएस के जवान, मंदिर के स्वयंसेवक और उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन से लगातार निगरानी रखी जा रही है।
मुख्य श्री काशी विश्वनाथ धाम के अलावा पूरी काशी के समस्त पौराणिक, ऐतिहासिक और प्रमुख शिवालयों में भी सुबह से ही शिवभक्तों का अथाह रेला उमड़ा हुआ है। दारानगर स्थित अकाल मृत्यु को हरने वाले महामृत्युंजय मंदिर, गंगा तट पर बसे गौरी केदारेश्वर, विशाल शिवलिंग वाले तिलभांडेश्वर मंदिर और बीएचयू परिसर स्थित न्यू विश्वनाथ मंदिर सहित शहर के तमाम छोटे-बड़े शिवालयों में श्रद्धालु हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र, मंदार, भांग और धतूरा लिए घंटों कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए। चारों दिशाओं में गूंजती डमरुओं की डिम-डिम, ढोल-नगाड़ों की थाप, शंखनाद और निरंतर बजते शिव भजनों की धुनों से पूरी काशी नगरी इस समय अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर होकर साक्षात कैलाश धाम में परिवर्तित हो चुकी है।
