रिपोर्ट: प्रणव कुमार अभय / नई दिल्ली
देश भर के विश्वविद्यालयों में पिछले 36 दिनों से जारी सीजेपी (CJP) विरोधी छात्र आंदोलन शनिवार को आखिरकार समाप्त हो गया। केंद्र सरकार और आंदोलनकारी छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में सहमति बनने के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन वापस लेने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने के सरकारी आश्वासन के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में धरने पर बैठे छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
दिन भर चले इस घटनाक्रम के केंद्र में राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर रहा, जहाँ दोपहर में केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते का ऐलान किया। इसके तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से शांतिपूर्वक जंतर-मंतर खाली करने की घोषणा की, जिसके बाद कई दिनों से सुरक्षा कारणों से बंद पड़े आसपास के रास्तों और मेट्रो स्टेशनों को आम जनता की आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज हुई तमाम राजनीतिक या प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर को रद्द किया जाएगा और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस पूरे आंदोलन की मुख्य वजह 4-वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में अगले वर्ष प्रमोशन के लिए अनिवार्य की गई 7.5 सीजेपी (CJP) की कड़ी शर्त थी। छात्रों का तर्क था कि इतनी कठिन अनिवार्यता के कारण लाखों होनहार विद्यार्थी रिसर्च और ऑनर्स की डिग्री से वंचित हो रहे थे। वार्ताओं के दौरान सरकार और शिक्षा विभाग ने इस नियम में ढील देने और इसे व्यावहारिक बनाने की मांग पर अपनी मुहर लगा दी है। इसके साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और पेपर-लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक विशेष सुधार समिति के गठन पर भी सहमति बनी है।
दिल्ली में समझौते की घोषणा से पहले देश के अन्य राज्यों में भी आंदोलन का तीखा असर देखने को मिला। बिहार में छात्र संगठनों द्वारा बुलाए गए ‘बिहार बंद’ के दौरान सुबह पटना के डाकबंगला चौराहे और जेपी गोलंबर पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं। हालांकि, शाम होते-होते जैसे ही दिल्ली से मांगों के स्वीकार होने की आधिकारिक खबर पहुंची, पटना सहित अन्य शहरों में जारी विरोध प्रदर्शन विजय जुलूसों में बदल गए और छात्रों ने ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी सफलता का जश्न मनाते हुए प्रदर्शन खत्म कर दिया।
संसद के मानसून सत्र से लेकर सड़कों तक गरमाए इस राष्ट्रीय मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी अब थम गया है। छात्र संगठनों ने सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन पर संतोष व्यक्त किया है और कहा है कि वे परीक्षा सुधार समिति की आगामी बैठकों में अपने सुझाव रखेंगे। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद अब देशभर के तमाम विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है तथा छात्र पुनः अपनी पढ़ाई और कक्षाओं की ओर लौटने लगे
हैं।
