नितिन गुप्ता
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 के परिणामों की घोषणा के साथ ही लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की परीक्षा ने सफलता के कई नए रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस साल कुल 11.21 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है, जो देश के चिकित्सा इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इस बार की परीक्षा में पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पंशुल बंसल ने इतिहास रचते हुए संयुक्त रूप से ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल की है। दोनों ही होनहारों ने 720 में से 715 अंकों के जादुई आंकड़े को छूकर अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया है। परिणाम घोषित होने के साथ ही एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर ट्रैफिक का भारी दबाव देखा गया, जहां छात्रों के लिए फाइनल आंसर-की और व्यक्तिगत स्कोरकार्ड भी लाइव कर दिए गए हैं।
इस वर्ष के नतीजों में न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी कई चौंकाने वाले और प्रेरणादायक प्रदर्शन देखने को मिले हैं। संयुक्त टॉपर्स आर्यन और पंशुल के अलावा, बिहार की रिया रंजन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रिया ने देश भर में छठा स्थान (AIR 6) प्राप्त किया है और वह ओबीसी-एनसीएल (OBC-NCL) कैटेगरी में देश की टॉपर बनी हैं। रिया की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में छात्रों ने टॉप 50 और टॉप 100 की सूची में अपनी जगह बनाई है, जिससे यह साफ होता है कि बड़े कोचिंग हब्स के साथ-साथ अब छोटे शहरों से स्व-अध्ययन (सेल्फ स्टडी) करने वाले छात्रों का ग्राफ भी तेजी से ऊपर चढ़ रहा है।
नीट यूजी 2026 के आंकड़ों का सबसे सुखद और महत्वपूर्ण पहलू महिला उम्मीदवारों का शानदार प्रदर्शन रहा है। इस साल भी ‘बेटियों’ ने लड़कों से कई कदम आगे निकलकर सफलता का परचम लहराया है। परीक्षा में सफल होने वाले कुल परीक्षार्थियों में से 58 प्रतिशत से अधिक संख्या छात्राओं की है। अगर उत्तीर्ण प्रतिशत की बात करें, तो जहां कुल पंजीकृत छात्रों में से 55.1 प्रतिशत छात्र सफल हुए, वहीं छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 56.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। चिकित्सा जगत में महिलाओं की यह बढ़ती भागीदारी न केवल देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह बदलते सामाजिक परिवेश और महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल भी है। कई राज्यों के स्टेट टॉपर्स की सूची में भी छात्राओं ने पुरुषों के मुकाबले बेहतर रैंक और अंक हासिल किए हैं।
परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष प्रश्नपत्र के संतुलित स्तर और छात्रों की बढ़ती जागरूकता के कारण कट-ऑफ स्कोर में अभूतपूर्व उछाल देखा गया है, जिसने कई शिक्षाविदों को हैरान कर दिया है। सामान्य और ईडब्ल्यूएस (UR/EWS) श्रेणी के लिए इस बार क्वालीफाइंग कट-ऑफ का दायरा 715 से 213 अंक के बीच रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। वहीं, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (OBC/SC/ST) श्रेणियों के लिए क्वालीफाइंग कट-ऑफ 212 से 177 अंक के बीच दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि क्वालीफाइंग कट-ऑफ ऊंचा होने के कारण देश के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) सीटों के लिए मारामारी और बढ़ जाएगी। अब सामान्य श्रेणी के छात्रों को एक अच्छी सरकारी सीट सुरक्षित करने के लिए बेहद उच्च स्कोर की आवश्यकता होगी, जिससे इस बार की काउंसलिंग बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होने वाली है।
इस बार परीक्षा के आयोजन से लेकर नतीजों के प्रकाशन तक की पूरी प्रक्रिया को एनटीए ने बेहद कड़े सुरक्षा इंतजामों और पारदर्शी तरीके से पूरा किया है। देश के 551 शहरों और विदेशों के 14 प्रमुख शहरों में बनाए गए 5,454 केंद्रों पर आयोजित हुई इस विशाल परीक्षा में करीब 20 लाख परीक्षार्थियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। एनटीए ने इस बार मेडिकल एडमिशन सत्र को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह री-इंजीनियर किया, जिसके परिणामस्वरूप रिकॉर्ड समय में बिना किसी त्रुटि के परिणाम जारी किए जा सके। परिणामों की घोषणा के बाद अब सभी की नजरें काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिकी हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) जल्द ही 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) सीटों के लिए काउंसलिंग का विस्तृत शेड्यूल जारी करेगी, जिसके तुरंत बाद राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटीज शेष 85 प्रतिशत राज्य कोटा सीटों के लिए दाखिले की खिड़की खोलेंगी।

By नवप्रभा टाइम्स

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