अवसर: मुफ्त में गरीब योग्य छात्रों को दिल्ली के मिशन आइएएस में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का मिला मौका
– गरीबी व अभाव का बाधा हुआ समाप्त, ड्रेस,आवास, कोचिंग व तैयारी, भोजन तक फ्री
प्रणव कुमार अभय, नई दिल्ली
बिहार के गोपालगंज के गंडक नदी का दियारा इलाका. जहां कभी जंगल पार्टी सरगनाओं की बंदूकें गरजती थी. बाढ़ प्रभावित गांव. घटाटोप अशिक्षा. जलालत से दिन की शुरूआत होती और शराब के साथ सांझ हो जाती. जहां कभी अवसर बहुत नहीं थे और कई बच्चों का जीवन अनिश्चितता से घिरा हुआ था, उसी दिया में खामोश क्रांति की शुरुआत हुई. यह क्रांति शिक्षा, दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प से प्रेरित थी. यह एक ऐसा आंदोलन है जहां शिक्षा अपराध को हराती है, अवसर सीमाओं को पराजित करता है और आशा निराशा को हराती है. मांझा थाना के डुमरिया गांव के रहने वाले ई सुरेंद्र त्रिपाठी के ज्येष्ठ पुत्र निलेश त्रिपाठी 2021 में वर्षों वाद दिल्ली से गांव पहुंचे. हालात को देख कर नीलेश त्रिपाठी ने एक साहसिक कदम उठाये. निराशा के बीच उन्हें आशा की ज्योत जलाने का कार्य किये. शेयर इंडिया स्माइल फाउंडेशन के सहयोग से और शताक्षी एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट संस्थापक नवीन श्रीवास्तव के माध्यम से गंडक नदी तटवर्ती के गांवों में शिक्षा केंद्र स्थापित किये. कुछ ही छात्रों से शुरू हुआ, यह प्रयास शीघ्र ही एक सशक्त आंदोलन में तब्दील हो गया. आज चार शिक्षा केंद्र कार्यरत हैं. लगभग 800 बच्चों को वर्दी, किताबें, जूते और अन्य आवश्यक वस्तुएं निःशुल्क मिल रही हैं. हजारों जिंदगियां बदल रही हैं. अब यहां से निकलने वाले छात्रों को दिल्ली में संचालित मिशन आइएएस में पढ़कर यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होने का मौका उपलब्ध है.
मिशन आइएएस ने गरीब बच्चों को दिया अवसर
बुनियादी शिक्षा तक ही सीमित नहीं रही. छात्रों को देश के भावी नौकरशाहों में परिवर्तित करने की मुहिम भी शुरू हो गयी. देश के ख्यातिलब्ध शिक्षाविद व यूपीएससी के मार्गदर्शक हेमंत झा व निलेश त्रिपाठी ने शेयर इंडिया के सहयोग से दिल्ली में मिशन आइएएस की शुरुआत कर दिये, एक ऐसी पहल जो वित्तीय बाधाओं को दूर करती है और गरीब योग्य छात्रों को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के लिए सशक्त बनाती है. जहां मुफ्त कोचिंग, आवास, भोजन, किताबें, पुस्तकालय की सुविधा और डिजिटल संसाधन इसलिए उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि प्रत्येक छात्र को सम्मान के साथ वह सब कुछ मिल सके जिसकी उसे आवश्यकता है. वर्ष 2026 में मिशन आइएएस में कुल 31 छात्रों की तैयारी हु़ई. जिसमें यूपीएससी में इन छात्रों में 10 छात्रों ने यूपीएससी में सफलता हासिल किया. जबकि दो छात्र यूपीपीएससी में सफल रहे तो चार छात्र माई भारत में जिला युवा अधिकारी चूने गये. इस वर्ष यहां 46 छात्र तैयारी कर रहे है.
शिक्षा क्रांति को शेयर इंडिया के सीइओ सचिन गुप्ता का भरपूर समर्थन प्राप्त है. जो शेयर इंडिया के सीआरएस फंड से अपने नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता से इस पहल को विकास के लिए आवश्यक संसाधन और ढांचा प्राप्त हो. बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, मुफ्त शैक्षिक सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी दूरदृष्टि ने एक विचार को परिवर्तन के एक स्थायी मॉडल में बदल दिया.
छात्र शिक्षार्थी से भावी प्रशासक बनने लगे
इस मिशन के केंद्र में हेमंत झा हैं. उनका मार्गदर्शन छात्रों को सशक्त शैक्षणिक आधार प्रदान करने, आत्मविश्वास और अनुशासन का संचार करने और तैयारी के प्रत्येक चरण में उनका मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उनके मार्गदर्शन में छात्र शिक्षार्थी से भावी प्रशासक बनते हैं. निलेश त्रिपाठी, शेयर इंडिया और हेमंत झा के संयुक्त प्रयासों से एक पहल मात्र नहीं, बल्कि बदलाव का एक आंदोलन खड़ा हो गया है.
