प्रणव कुमार दुबे

नई दिल्ली, 3 जून। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक पिछले दिनों भुवनेश्वर में संपन्न हुई। बैठक में शैक्षिक सुधार, महिला सुरक्षा, शहरी माओवाद और वैश्विक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चार प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इस बैठक में देशभर के विभिन्न प्रांतों से 400 से अधिक प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।

केंद्रीय कार्यसमिति में पारित प्रस्ताव,

लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना हेतु पश्चिम बंग के जनमानस का अभिनंदन व स्वागत किया गया। वहीं

शैक्षिक सुधारों को परिणामकारी बनाने हेतु धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक। सशस्त्र माओवाद के समाप्तिकाल में शहरी माओवाद एक गंभीर चुनौती।

संगठित आपराधिक एवं जिहादी मानसिकता से महिलाओं के शोषण तथा मतांतरण पर लगे लगाम।

वैश्विक अनिश्चितता के दौर में संयम एवं सजगता का सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प समय की मांग। कुल चार प्रस्ताव रखे गए।

राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक-आर्थिक विषयों तथा समसामयिक चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। अखिल भारतीय विचार बैठक एवं संगठनात्मक विचार बैठक के निर्णयों की समीक्षा, अभियानात्मक, कार्यक्रमात्मक एवं संगठनात्मक कार्यों का मूल्यांकन तथा आगामी वर्ष की विस्तृत कार्ययोजना का भी निर्धारण किया गया। अन्तर्राज्यीय छात्र जीवन दर्शन (SEIL) की गौरवपूर्ण राष्ट्रीय एकात्मकता यात्रा के 60 वर्ष पूर्ण होने पर ‘SEIL@60’ कार्यक्रम सम्पूर्ण भारत में आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’, ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’, आपातकाल निषेध के 50 वर्ष, श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष तथा संत रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव जैसे विभिन्न आयामों पर वर्षभर देशव्यापी अभियान चलाए जाएंगे।

अभाविप का यह स्पष्ट मत है कि नीट-यूजी, सीयूईटी, सीबीएससी सहित विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आयी विसंगतियाँ और पेपर लीक की घटनाएँ विद्यार्थियों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हैं। ऐसी प्रशासनिक चूक किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। अभाविप दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोरतम कार्रवाई, एनटीए की भूमिका की निष्पक्ष जांच तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु पूर्णतः पारदर्शी, स्वच्छ परीक्षा तंत्र विकसित करने की मांग करती है। इन विसंगतियों के चलते विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के मन में अविश्वास का भाव उत्पन्न हुआ है, उसे दूर करने की अभाविप की मांग है।

बैठक में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा त्रि-भाषा नीति को सराहते हुए इसके पूर्ण क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। अभाविप ने इसे भारतीय भाषाओं के संवर्धन, राष्ट्रीय एकात्मता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए भारतीय भाषाओं में परीक्षा अनिवार्य रूप से कराने हेतु माँग की है। यह नीति विद्यार्थियों को बहुभाषी दक्षता प्रदान करने के साथ-साथ देश की भाषाई विविधता के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अभाविप ने राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में उद्योग जगत से विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध, नवाचार, पेटेंट तथा भारतीय भाषाओं में अकादमिक लेखन और अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु निवेश बढ़ाने का आह्वान किया है। अभाविप का मानना है कि उद्योग, राज्य विश्वविद्यालय, आईआईटी और विभिन्न शोध संस्थानों के समन्वय से अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-प्रायोजित पीएचडी, स्टार्टअप एवं पेटेंट आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। भारतीय भाषाओं में शोध पत्र लेखन को बढ़ावा देने हेतु विशेष पुरस्कार, अनुदान एवं प्रोत्साहन योजनाएं भी विकसित की जानी चाहिए। इससे युवाओं को अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे तथा भारत में नवाचार आधारित सशक्त शोध संस्कृति का विकास होगा। इस उद्देश्य से अभाविप का एक प्रतिनिधिमंडल उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से पत्राचार करेगा तथा भेंट कर इस विषय पर विस्तृत संवाद भी करेगी।

अभाविप ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्त कुलपति पदों पर शीघ्र नियुक्ति की मांग दोहराते हुए महामहिम राष्ट्रपति से आवश्यक हस्तक्षेप का आग्रह किया है। वर्तमान में देश के 13 से अधिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपति पद रिक्त हैं जिससे प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अभाविप ने इन पदों पर कुलपति की नियुक्ति हेतु पूर्व में भी मांग की थी, अपनी मांग को अभाविप पुनः दोहराती है और इसके हेतु महामहिम राष्ट्रपति जी को पत्र लिख आग्रह करेगी। विश्वविद्यालयों में कुलपति पदों का लंबे समय तक रिक्त रहना उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं शैक्षणिक वातावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अतः इन पदों पर शीघ्र नियुक्तियां सुनिश्चित कर विश्वविद्यालयों में सकारात्मक एवं परिणामकारी शैक्षिक वातावरण निर्मित किया जाना चाहिए।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में पारित प्रस्ताव विकसित, सुरक्षित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध भारत के निर्माण के प्रति अभाविप की व्यापक दृष्टि को प्रतिबिंबित करते हैं। बैठक में शैक्षिक सुधारों, महिलाओं की सुरक्षा, शहरी माओवाद जैसी चुनौतियों तथा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सजग नागरिक चेतना के निर्माण पर गंभीर चिंतन किया गया है। नीट-यूजी, सीयूईटी, सीबीएससी बोर्ड परीक्षा सहित विभिन्न परीक्षाओं में हुई विसंगतियाँ एवं पेपर लीक की घटनाएँ अत्यंत चिंताजनक हैं। अभाविप दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, एनटीए की निष्पक्ष जांच तथा पारदर्शी एवं विश्वसनीय परीक्षा तंत्र की स्थापना की मांग करती है। विसंगतियों के चलते विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के मन में उत्पन्न अविश्वास को दूर करने की मांग करती है। अभाविप ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप त्रि-भाषा नीति का स्वागत करते हुए भारतीय भाषाओं में अधिकाधिक परीक्षाएँ आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उद्योग जगत से अनुसंधान, नवाचार, पेटेंट तथा भारतीय भाषाओं में अकादमिक लेखन को प्रोत्साहन देने हेतु निवेश बढ़ाने का आह्वान किया है तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्त कुलपति पदों पर शीघ्र नियुक्ति की आवश्यकता को रेखांकित किया है। आगामी वर्ष में ‘SEIL@60’, ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’, ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’, आपातकाल निषेध के 50 वर्ष, श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष तथा संत रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव जैसे अभियानों के माध्यम से अभाविप राष्ट्रीय एकात्मता, सांस्कृतिक चेतना और युवाओं की सकारात्मक सहभागिता को सशक्त करेगी। हमें विश्वास है कि भारत का युवा वर्ग अपनी प्रतिभा, नवाचार क्षमता और राष्ट्रीय चेतना के बल पर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

By नवप्रभा टाइम्स

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