प्रणव कुमार दुबे
बिहार के पूर्व राज्यपाल, वरिष्ठ शिक्षाविद और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी. वाई.) पाटिल का मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे, वह लंबे समय से आयु संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देशभर के नेताओं, शिक्षाविदों और विभिन्न संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
डॉ. डी. वाई. पाटिल का सार्वजनिक जीवन राजनीति और शिक्षा, दोनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रेरणादायक रहा। महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व सौंपे गए। उन्होंने मार्च 2013 से नवंबर 2014 तक बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। इसके अलावा त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। बिहार में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों में बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और शैक्षणिक सुधारों पर विशेष बल दिया।
हालांकि उनकी सबसे बड़ी पहचान शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों से बनी। उन्होंने ‘डी. वाई. पाटिल ग्रुप’ की स्थापना कर मेडिकल, इंजीनियरिंग, डेंटल, मैनेजमेंट और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों का विस्तृत नेटवर्क स्थापित किया। उनके प्रयासों से देशभर के लाखों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। खासकर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए उन्होंने उच्च शिक्षा के नए रास्ते खोले।
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उनके द्वारा स्थापित अस्पतालों और चैरिटेबल संस्थानों ने वर्षों से गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई। शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें **पद्मश्री** से सम्मानित किया था।
डॉ. डी. वाई. पाटिल का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि दूरदर्शी सोच और समाज के प्रति समर्पण से किस तरह स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने केवल संस्थानों का निर्माण नहीं किया, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने का काम किया।
उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए कोल्हापुर स्थित आवास पर रखा गया है, जहां राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक जगत की अनेक हस्तियाँ तथा बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे रहे हैं। डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन देश के शिक्षा जगत और सार्वजनिक जीवन के लिए ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई आसानी से संभव नहीं होगी।
