नितिन गुप्ता

नई दिल्ली: देशभर में मानसून के दौरान होने वाली मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के कारण अक्सर कई इलाकों में गंभीर जलभराव और बाढ़ जैसी विकराल स्थिति पैदा हो जाती है। सड़कों, पार्किंग स्थलों, निचले इलाकों और सोसायटियों के बेसमेंट में कई-कई फीट पानी भर जाने से लोगों की महंगी से महंगी गाड़ियां भी पूरी तरह जलमग्न हो जाती हैं। जलभराव के इस दौर में वाहन मालिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी कार को सुरक्षित बचाने की होती है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग घबराकर या जानकारी के अभाव में पानी में फंसी कार को तुरंत स्टार्ट करके सुरक्षित जगह पर ले जाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और बीमा कंपनियों के अनुसार, बाढ़ या जलभराव में डूबी गाड़ी की चाबी घुमाना या पुश-स्टार्ट बटन दबाना सबसे आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। पानी में डूबी कार को जबरन स्टार्ट करने से न केवल उसका इंजन हमेशा के लिए सीज हो सकता है, बल्कि बीमा कंपनियां इसे चालक की लापरवाही मानकर लाखों रुपये के क्लेम को पलक झपकते ही खारिज भी कर सकती हैं।

जब कोई वाहन पानी में डूबा होता है, तो उसके एयर इनटेक पाइप और एग्जॉस्ट के जरिए पानी सीधे इंजन के सिलेंडरों के अंदर प्रवेश कर जाता है। ऐसे में जब चालक इग्निशन ऑन करता है, तो इंजन में ‘हाइड्रोलॉक’ की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है, क्योंकि हवा की तुलना में पानी कंप्रेस या दबता नहीं है। इसके परिणामस्वरूप पिस्टन, कनेक्टिंग रोड और इंजन का पूरा ब्लॉक बुरी तरह टूट जाता है और गाड़ी का इलेक्ट्रिकल सिस्टम भी पूरी तरह शॉर्ट-सर्किट होकर ठप पड़ जाता है। इस प्रकार के भारी नुकसान की मरम्मत का खर्च कई बार गाड़ी की कुल कीमत का 30 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। बीमा कंपनियां ऐसे नुकसान को ‘कॉन्सिक्वेंशियल डैमेज’ यानी लापरवाही के कारण बढ़ा हुआ नुकसान मानती हैं और स्टैंडर्ड कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के तहत इसका एक पैसा भी देने से मना कर देती हैं, जब तक कि आपके पास विशेष ‘इंजन प्रोटेक्टर कवर’ न हो।

जलभराव में गाड़ी फंसने या डूब जाने की सूरत में वाहन मालिकों को बेहद संयम और बुद्धिमत्ता से काम लेना चाहिए। जैसे ही आपकी गाड़ी पानी में डूबे, सबसे पहले तो यह ठान लें कि किसी भी स्थिति में इग्निशन ऑन नहीं करना है और न ही गाड़ी को गियर में डालकर धक्का देने या स्टार्ट करने की कोशिश करनी है। इसके तुरंत बाद, क्लेम की प्रक्रिया को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए गाड़ी की वर्तमान स्थिति, आसपास के जलस्तर और कार के अंदर हुए नुकसान की स्पष्ट तस्वीरें और वीडियो बना लें ताकि आपके पास पुख्ता सबूत सुरक्षित रहे। अगले कदम के रूप में बिना किसी देरी के अपनी बीमा कंपनी और अधिकृत सर्विस सेंटर को घटना की आधिकारिक सूचना देकर क्लेम फाइल करें और अपनी कार की पॉलिसी कॉपी, आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आवश्यक दस्तावेज संभालकर तैयार रखें।

बीमा क्लेम की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह ध्यान रखनी चाहिए कि जब तक बीमा कंपनी का अधिकृत सर्वेयर मौके पर या वर्कशॉप में आकर गाड़ी का भौतिक निरीक्षण न कर ले और हरी झंडी न दे दे, तब तक गाड़ी में किसी भी तरह की मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स बदलने या उसे साफ करने का काम शुरू न कराएं। गाड़ी को जलभराव वाले स्थान या गैरेज तक ले जाने के लिए हमेशा प्रोफेशनल रोडसाइड असिस्टेंस या टोइंग वैन (हाइड्रोलिक क्रेन) की ही सेवाएं लें। यदि आप अपनी गाड़ी को टोइंग के जरिए सुरक्षित वर्कशॉप पहुंचाते हैं और बीमा कंपनी के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करते हैं, तो आपका इंश्योरेंस क्लेम बिना किसी अड़चन के पास हो जाएगा और आप किसी भी बड़े वित्तीय नुकसान से आसानी से बच सकते हैं।

By नवप्रभा टाइम्स

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