भारती
बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक फिजा में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। राजधानी पटना की सड़कों पर उतरते छात्र आक्रोश और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर गहराते असंतोष के बीच राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपात बैठक बुलाई है। यह समीक्षा बैठक दोपहर 12:00 बजे से पटना स्थित लोक सेवक आवास में आयोजित की जाएगी। राज्य में चौथे चरण की शिक्षक बहाली (TRE-4) की तारीखों, भर्ती नियमों और अन्य लंबित मांगों को लेकर उपजे भारी असंतोष के बीच बुलाई गई इस बैठक को प्रशासनिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
पिछले कई दिनों से राजधानी का गर्दनीबाग इलाका आंदोलित अभ्यर्थियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर चौथे चरण की शिक्षक बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, परीक्षा समय पर आयोजित करने और पूर्व की भर्तियों में रह गई कमियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि बार-बार के आश्वासनों के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस अमल नहीं हो रहा है, जिससे उनका भविष्य अधर में अटका हुआ है। छात्रों का यह आंदोलन अब धीरे-धीरे अधिक उग्र रूप लेता जा रहा है, जिसका सीधा दबाव राज्य प्रशासन और सरकार पर देखने को मिल रहा है।
छात्रों के इस बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए विपक्षी दल भी पूरी तरह से हमलावर मोड में आ गए हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी कार्यकर्ताओं और अभ्यर्थियों ने पटना में लोक भवन मार्च निकाला, जिसने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए पुलिस बल ने काफी कड़ा रुख अपनाया और जगह-जगह भारी बैरिकेडिंग करके इस मार्च को बीच रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और खींचतान देखने को मिली, जिसके बाद पूरी राजधानी में घंटों तक हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा चलता रहा।
एक तरफ जहां तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए तीखे राजनीतिक हमले बोले, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने भी इस विरोध प्रदर्शन पर जोरदार पलटवार किया। एनडीए के नेताओं का कहना है कि विपक्ष छात्रों के आंदोलन को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए भुनाने की कोशिश कर रहा है और प्रदर्शन के नाम पर केवल राजनीति की जा रही है। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर ने शिक्षा विभाग और सरकार पर त्वरित फैसला लेने का दबाव और अधिक बढ़ा दिया है।
इसी भारी तनाव और प्रशासनिक दबाव के बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा दोपहर 12:00 बजे बुलाई गई यह बैठक अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है। बैठक में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित विभागीय मंत्रियों की मौजूदगी रहेगी। बैठक का मुख्य एजेंडा TRE-4 परीक्षा की तिथियों की समीक्षा करना, भर्ती नियमों में सुधार पर चर्चा करना और गर्दनीबाग में डटे आंदोलित अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों का समाधान निकालना है, ताकि राज्य में प्रशासनिक स्थिरता बहाल हो सके।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी बेहद चर्चा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज शाम दिल्ली के लिए रवाना होने वाले हैं। दिल्ली रवानगी से ठीक पहले बुलाई गई इस मैराथन बैठक के काफी गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि केंद्र के शीर्ष नेताओं से मुलाकात से पहले राज्य सरकार शिक्षक अभ्यर्थियों के इस ज्वलंत मुद्दे को सुलझाना चाहती है, ताकि किसी भी तरह का सियासी नुकसान न उठाना पड़े।
इस समय पूरे बिहार के लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों, अभ्यर्थियों के परिजनों और आंदोलित युवाओं की निगाहें दोपहर 12:00 बजे होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक पर टिकी हुई हैं। सभी को उम्मीद है कि शाम को मुख्यमंत्री के दिल्ली रवाना होने से पहले राज्य सरकार शिक्षक भर्ती परीक्षा, नए विज्ञापन और अभ्यर्थियों के हित से जुड़ा कोई बड़ा और ऐतिहासिक फैसला ले सकती है, जिससे लंबे समय से जारी इस गतिरोध का अंत हो सके।
