आदित्य शुक्ला
अमेरिकी राज्यों के साथ हुए एक ऐतिहासिक 18 अरब डॉलर के कानूनी समझौते के बाद मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) ने सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े सुरक्षा बदलावों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। लंबे समय से किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों, सोशल मीडिया की लत और डेटा प्राइवेसी में लापरवाही के गंभीर आरोपों का सामना कर रही इस टेक दिग्गज ने आखिरकार 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सुरक्षा के कई कड़े मानदंड लागू करने की कानूनी प्रतिबद्धता जताई है। यद्यपि कंपनी ने अदालत में अपनी ओर से किसी भी प्रकार की कानूनी गड़बड़ी या गलत काम से साफ इनकार किया है, लेकिन उसने यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि प्लेटफॉर्म पर युवा यूजर्स के भविष्य और सुरक्षा के लिए बुनियादी सुधार करना अब अनिवार्य हो चुका है।
इस व्यापक और दूरगामी फैसले का प्राथमिक उद्देश्य किशोरों के दैनिक स्क्रीन टाइम को कड़ाई से नियंत्रित करना और उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल पर माता-पिता की देखरेख को पहले से कहीं अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और शक्तिशाली बनाना है। मेटा ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से 11 प्रमुख सुरक्षा सुधारों का एक विस्तृत खाका पेश किया है, जो आने वाले समय में दुनिया भर के करोड़ों किशोरों के ऐप इस्तेमाल करने के तरीके को पूरी तरह से बदलकर रख देंगे। इन बदलावों के जरिए कंपनी का दावा है कि वह सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण युवाओं में पनप रहे अवसाद, मानसिक तनाव, एकाग्रता की कमी, नींद के विकार और बॉडी इमेज से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर नकेल कसने में पूरी तरह कामयाब होगी।
नए सुरक्षा ढांचे के सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय हिस्से के रूप में अब फेसबुक और इंस्टाग्राम दोनों ऐप्स को मिलाकर दैनिक इस्तेमाल की अधिकतम समय-सीमा केवल दो घंटे तय की जा रही है। यह ‘2-घंटे की डेली टाइम लिमिट’ हर 18 साल से कम उम्र के यूजर के अकाउंट पर डिफ़ॉल्ट रूप से सक्रिय रहेगी। सबसे खास बात यह है कि इस समय-सीमा को बढ़ाने या पूरी तरह से हटाने का अधिकार केवल माता-पिता के पास ही सुरक्षित रहेगा; उनकी स्पष्ट डिजिटल अनुमति या पासकोड के बिना कोई भी किशोर इस लिमिट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर पाएगा, जिससे अभिभावकों को अपने बच्चों के डिजिटल जीवन और स्क्रीन टाइम पर सीधी निगरानी रखने में मदद मिलेगी।
किशोरों की नींद के प्राकृतिक चक्र को बिगड़ने से बचाने और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से एक समर्पित ‘ऑटोमैटिक नाइट मोड’ सिस्टम पेश किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत मध्यरात्रि यानी रात 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ऐप्स के सभी मुख्य कंटेंट फीचर्स—जैसे कि न्यूज फीड, स्टोरीज, रील्स और एक्सप्लोर पेज—पूरी तरह से ब्लॉक और म्यूट रहेंगे। देर रात तक स्क्रीन से चिपके रहने और नींद खराब करने की हानिकारक आदत पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाने के लिए इस कदम को टेक विशेषज्ञों और बाल मनोवैज्ञानिकों द्वारा एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।
पढ़ाई और स्कूल के घंटों के दौरान बच्चों का ध्यान भटकने से रोकने के लिए मेटा ‘स्कूल मोड नोटिफिकेशन’ व्यवस्था को भी अनिवार्य रूप से लागू करने जा रहा है। इसके तहत रोजाना सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक ऐप्स के सभी सामान्य पुश नोटिफिकेशन पूरी तरह से म्यूट रहेंगे ताकि कक्षा में अध्ययन के दौरान किसी भी प्रकार की रुकावट न आए। हालांकि, आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा अलर्ट और परिजनों के डायरेक्ट मैसेज की सुविधा चालू रखी जाएगी। इसके साथ ही, ऐप में लगातार 15 मिनट तक स्क्रॉल करने पर एक सतर्कता अलर्ट मिलेगा, जिसके बाद 60 और 90 मिनट पर भी लगातार रिमाइंडर भेजे जाएंगे ताकि यूजर्स को समय बीतने का अहसास बना रहे।
डिजिटल लत और माइंडलेस स्क्रॉलिंग के जाल को तोड़ने के लिए मेटा अब किशोरों को ‘नॉन-एल्गोरिदमिक फीड’ चुनने का सीधा विकल्प दे रहा है। इस सेटिंग के चालू होने पर एल्गोरिदम यूजर्स की पसंद का अध्ययन करके उन्हें लगातार लुभाने वाला या लत लगाने वाला कंटेंट नहीं परोस पाएगा, बल्कि फीड में सामान्य और व्यवस्थित कंटेंट ही दिखेगा। माता-पिता भी अपने बच्चों के अकाउंट पर इस नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड को अनिवार्य रूप से लागू कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ऐप्स में वीडियो ‘ऑटोप्ले’ बंद करने का विकल्प भी जोड़ा गया है, जिसका अर्थ है कि एक वीडियो खत्म होने के बाद अगला वीडियो अपने आप नहीं चलेगा, बल्कि यूजर को खुद स्क्रीन पर स्वाइप या टैप करना होगा।
सोशल मीडिया के कारण किशोरों में बढ़ते मानसिक दबाव, अवास्तविक तुलना और बॉडी शेमिंग जैसी समस्याओं पर रोक लगाने के लिए मेटा ने दो बड़े मनोवैज्ञानिक कदम उठाए हैं। सबसे पहले तो किशोर अकाउंट्स पर पोस्ट किए गए फोटो और वीडियो के लाइक्स व रिएक्शन की संख्या डिफ़ॉल्ट रूप से छिपी रहेगी, जिससे दूसरों से ज्यादा लाइक्स पाने की होड़ और सामाजिक ‘वैलिडेशन’ का मानसिक तनाव खत्म हो सके। दूसरा, सुंदरता के अवास्तविक मानकों को बढ़ावा देने वाले मेकअप, फेयरनेस और कॉस्मेटिक सर्जरी से जुड़े ‘एक्सट्रीम कॉस्मेटिक फिल्टर्स’ पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है, ताकि किशोर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ सहज महसूस कर सकें।
प्राइवेसी और ऑनलाइन सुरक्षा की नींव को मजबूत करने के लिए उन्नत एआई आधारित ‘एज अश्योरेंस’ सिस्टम लागू किया जा रहा है, जो उम्र छुपाकर बनाए गए 13 साल से कम उम्र के फर्जी अकाउंट्स को पहचानकर तुरंत हटाएगा। वहीं 13 से 17 साल के यूजर्स को खुद-ब-खुद ’13+ कंटेंट गार्डरेल्स’ के तहत सीमित और केवल आयु-अनुकूल कंटेंट ही दिखाया जाएगा। अजनबियों के कुप्रभाव से बचाने के लिए सभी किशोर प्रोफाइल डिफ़ॉल्ट रूप से प्राइवेट रहेंगी और संदिग्ध वयस्क अकाउंट्स के लिए किशोरों को ढूंढना या उनसे संपर्क साधना असंभव बना दिया जाएगा। हालांकि, मेटा ने स्पष्ट किया है कि डायरेक्ट मैसेजिंग की सुविधा टाइम लिमिट और नाइट मोड के दौरान भी उपलब्ध रहेगी, ताकि परिवार और विश्वसनीय दोस्तों के साथ संचार का माध्यम हमेशा सुरक्षित रूप से खुला रहे।
