प्रणव कुमार दुबे

बिहार की राजधानी पटना के पॉश इलाके कंकड़बाग अंतर्गत चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में उस समय अचानक भारी अफरा-तफरी और सनसनी का माहौल बन गया, जब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की एक उच्चस्तरीय टीम ने बिहार एसटीएफ और स्थानीय पुलिस बल की भारी मौजूदगी के साथ जूडियो मॉल के समीप स्थित एक बहुमंजिला आवासीय अपार्टमेंट में अचानक दबिश दी। केंद्रीय जांच एजेंसी की इस त्वरित, योजनाबद्ध और गुप्त कार्रवाई से न सिर्फ अपार्टमेंट में रहने वाले निवासी बल्कि पूरे आसपास के क्षेत्र के लोग स्तब्ध रह गए, क्योंकि भारी संख्या में अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवानों और अधिकारियों की गाड़ियों ने पूरी इमारत को चारों तरफ से सख्त घेराबंदी में ले लिया था।

एनआईए की इस विशेष टीम का मुख्य उद्देश्य पूर्व से दर्ज एक बेहद संवेदनशील मामले से जुड़े संदिग्धों, उनके छुपने के गुप्त ठिकानों और उनके स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क की गहराई से पड़ताल करना था। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने पूरी मुस्तैदी और सतर्कता का परिचय देते हुए चिन्हित फ्लैट के मुख्य दरवाजे पर दस्तक दी और भीतर दाखिल होकर चप्पे-चप्पे का तलाशी अभियान शुरू किया। करीब घंटों तक चले इस व्यापक तलाशी अभियान और तकनीकी जांच के बावजूद, एनआईए की टीम को उस निर्दिष्ट ठिकाने से कोई भी संदिग्ध व्यक्ति, अवैध हथियार या अन्य कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हो सकी, जिससे प्राथमिक स्तर पर केंद्रीय टीम को खाली हाथ ही संतोष करना पड़ता नजर आ रहा था।

हालांकि, जब एनआईए के अधिकारी अपनी शुरुआती कार्रवाई समेटकर आगे की कानूनी रणनीति पर विचार कर ही रहे थे, ठीक उसी समय उस अपार्टमेंट परिसर के निचले हिस्से में एक ऐसा अप्रत्याशित और चौंकाने वाला वाकया घटा जिसने पूरी छापेमारी की दिशा ही दूसरी तरफ मोड़ दी। दरअसल, जिस इमारत में एनआईए की यह रेड चल रही थी, उसी परिसर के एक अन्य अलग फ्लैट में रहने वाला एक व्यक्ति बाहर भारी संख्या में पुलिस बल, एसटीएफ के जवानों और केंद्रीय जांच एजेंसियों की गाड़ियों को देखकर बुरी तरह घबरा गया। एनआईए की रेड का खौफ उस पर इस कदर हावी हुआ कि वह बिना सोचे-समझे हड़बड़ी में नीचे उतरा और अपनी स्कूटी को स्टार्ट करके मुख्य गेट से तेजी से बाहर भागने की नाकाम कोशिश करने लगा।

मुख्य प्रवेश द्वार पर मुस्तैदी से तैनात एसटीएफ और स्थानीय चित्रगुप्त नगर थाना पुलिस के सतर्क जवानों की पैनी नजर उस व्यक्ति की इस अचानक हुई संदिग्ध हलचल पर तुरंत पड़ गई। जवानों ने बिना एक सेकंड का भी समय गंवाए तुरंत घेराबंदी की और तेजी से भाग रहे उस शख्स को मौके पर ही दबोच लिया। एनआईए की रेड को देखकर अचानक इस कदर बदहवास होकर भागने की उसकी हरकत ने वहां मौजूद तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के मन में गहरा संदेह पैदा कर दिया। पुलिस टीम ने सुरक्षा और जांच के दृष्टिकोण से उसे तुरंत अपनी कस्टडी में लिया और मौके पर ही उसकी स्कूटी को जब्त करते हुए जांच शुरू कर दी।

जब सुरक्षाकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने गहरे संशय के आधार पर उसकी स्कूटी की डिग्गी और उसमें रखे एक कपड़े के झोले को खोलकर बारीकी से तलाशी ली, तो अंदर का नजारा देखकर वहां मौजूद हर एक अधिकारी के होश उड़ गए। स्कूटी की डिग्गी से भारतीय मुद्रा की 500-500 रुपये वाली कड़क गड्डियों के रूप में पूरे 20 लाख रुपये का भारी-भरकम कैश बरामद हुआ। जब हिरासत में लिए गए व्यक्ति के दस्तावेजों और पहचान पत्रों की जांच की गई, तो उसकी पहचान पूर्वी चंपारण जिले के चकिया क्षेत्र के रहने वाले अनमोल कुमार मोदी के रूप में हुई, जो उस वक्त उसी इमारत के एक फ्लैट में रह रहा था।

रकम की बरामदगी के तुरंत बाद जब एनआईए और पुलिस के अधिकारियों ने अनमोल कुमार मोदी से इतनी बड़ी नकद राशि के स्रोत, इसके असली मालिक और इसे ले जाने से जुड़े वैध कागजातों के बारे में तीखे सवाल-जवाब शुरू किए, तो वह पूरी तरह से घबरा गया। वह अधिकारियों के सामने लगातार अपने बयान बदलता रहा और पैसों से जुड़ा कोई भी वैध बिल, बैंक से निकासी की रसीद या संतोषजनक दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। उसकी इस घबराहट, हड़बड़ाहट और गोलमोल जवाबों ने यह साफ कर दिया कि यह पैसा बिना किसी कानूनी हिसाब-किताब के ले जाया जा रहा था, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर की आशंका गहरा गई।

प्राथमिक जांच और शुरुआती पूछताछ के बाद अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि एनआईए जिस विशिष्ट राष्ट्रविरोधी या आपराधिक नेटवर्क के सिलसिले में चित्रगुप्त नगर पहुंची थी, उससे इस 20 लाख रुपये की नकद राशि का सीधा संबंध फिलहाल सामने नहीं आया है। हालांकि, बिना किसी वैध दस्तावेज या आय के ज्ञात स्रोत के इतनी बड़ी मात्रा में नकद राशि का मिलना एक गंभीर वित्तीय अपराध और हवाला कारोबार की तरफ इशारा करता है। इसी वजह से स्थानीय पुलिस और एनआईए ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए बिना किसी देरी के तुरंत इसकी आधिकारिक सूचना आयकर विभाग की विशेष टीम को दी।

सूचना मिलते ही आयकर विभाग की एक विशेष जांच टीम तुरंत मौके पर पहुंची और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए बरामद किए गए पूरे 20 लाख रुपये के कैश को सीज कर अपनी कस्टडी में ले लिया। फिलहाल, चित्रगुप्त नगर थाना पुलिस और आयकर विभाग की संयुक्त टीम अनमोल कुमार मोदी को हिरासत में रखकर बेहद कड़ाई से पूछताछ कर रही है। आयकर अधिकारी अब इस बात की गहराई से पड़ताल में जुटे हैं कि इस भारी रकम का असली वित्तीय स्रोत क्या है, इसे कहां खपाने की योजना बनाई जा रही थी और क्या इसके तार किसी बड़े अंतरराज्यीय हवाला नेटवर्क या अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं।

By नवप्रभा टाइम्स

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