नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार अभय
दिल्ली के रानी बाग इलाके में हुए सनसनीखेज गैंगरेप कांड का तार बिहार के गोपालगंज से जुड़ने के बाद हड़कंप मच गया है। जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि वारदात में इस्तेमाल हुई बस गोपालगंज के सिधवलिया (रामपुर सदौवा) निवासी हैप्पी मल्होत्रा की है, जो ‘साईं दृष्टि प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम पर पंजीकृत है। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि यह बस कानूनी रूप से “सड़क पर चलने के लायक” थी ही नहीं। गोपालगंज परिवहन विभाग ने इस पर परमिट और इंश्योरेंस जैसे नियमों के उल्लंघन के कारण करीब 4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। 3 लाख रुपये का बकाया होने की वजह से विभाग ने इसे ‘डिजिटली इंपाउंड’ कर ब्लैकलिस्ट कर दिया था, लेकिन सिस्टम की कथित ‘सेटिंग’ के सहारे यह बस बिहार से दिल्ली तक बेखौफ मौत बनकर दौड़ रही थी।
सवारी के इंतजार में खड़ी महिला और हैवानों का जाल
वारदात की शिकार महिला सोमवार रात सरस्वती विहार स्टैंड पर घर जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी। जैसे ही यह निजी बस वहां रुकी, चालक और कंडक्टर ने मदद के बजाय उसे जबरन भीतर खींच लिया। वह बस, जिसे कायदे से पुलिस की कस्टडी या गैरेज में होना चाहिए था, वह पूरी रात रानी बाग से नांगलोई की सड़कों पर दरिंदगी का अड्डा बनी रही। आरोपियों ने पूरी रात चलती बस में पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर उसे सड़क किनारे फेंककर भाग निकले।
प्रशासनिक लापरवाही पर सुलगते सवाल
इस घटना ने गोपालगंज से लेकर दिल्ली तक के परिवहन और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जो बस सरकारी रिकॉर्ड में ‘जब्त’ दिखाई जा रही थी, उसने सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर दिल्ली की सड़कों पर कैसे प्रवेश किया? क्या रास्ते में पड़ने वाले चेक-पोस्ट और टोल प्लाजा पर इस ‘ब्लैकलिस्टेड’ बस को कभी रोका नहीं गया? फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने बस को जब्त कर चालक और कंडक्टर को जेल भेज दिया है, लेकिन इस मामले ने उस ‘सेटिंग’ के खेल को उजागर कर दिया है जो चंद रुपयों के लालच में अपराधियों को बेखौफ होने का मौका देता है
