नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार अभय
नई दिल्ली :देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली सरकार ने एक अभूतपूर्व ‘सेविंग प्लान’ पेश किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने की हालिया अपील के बाद, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के लिए एक व्यापक कार्ययोजना की घोषणा की है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को भी कम करेगी।
दफ्तरों के लिए नई कार्यप्रणाली: हफ्ते में दो दिन WFH
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण सरकारी और निजी क्षेत्रों के कामकाज के तरीके में बदलाव है। अब दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी हफ्ते में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल की खपत में भारी गिरावट आएगी। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने निजी कंपनियों और कॉरपोरेट जगत से पुरजोर अपील की है कि वे भी स्वेच्छा से अपने कर्मचारियों को दो दिन घर से काम करने की सुविधा दें, ताकि राष्ट्रीय बचत के इस अभियान में वे सहभागी बन सकें।
‘मेट्रो डे’ और परिवहन सुधार
सार्वजनिक परिवहन को लोकप्रिय बनाने के लिए हर सोमवार को ‘मेट्रो डे’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन दिल्ली सरकार के सभी छोटे-बड़े अधिकारी और मंत्री निजी वाहनों का त्याग कर मेट्रो या बस से दफ्तर पहुंचेंगे। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग और न्यायपालिका से भी इस मुहिम में जुड़ने का आग्रह किया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन कक्षाओं की संख्या बढ़ाने और अदालतों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने का सुझाव दिया है, ताकि लोगों को बेवजह लंबी यात्राएं न करनी पड़ें।
खर्चों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और स्वदेशी का संकल्प
वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए अगले 6 महीनों तक नए सरकारी वाहनों की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। हर विभाग को अपने बजट में 20 प्रतिशत की अनिवार्य कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रियों की फिजूलखर्ची रोकने के लिए उनकी विदेश यात्राओं और बड़े होटलों में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों पर अगले तीन महीनों के लिए रोक लगा दी गई है। आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देते हुए मुख्यमंत्री ने एलान किया कि अगले 90 दिनों तक दिल्ली के सभी सरकारी कार्यों में केवल ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
यह कदम न केवल ईंधन की बचत में सहायक होगा, बल्कि दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने और विदेशी मुद्रा बचाने की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित हो सकता है।
