रंजना बिष्ट
नई दिल्ली, 14 मई। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अभिमंच सभागार में सुप्रसिद्ध रंगकर्मी भानु भारती द्वारा निर्देशित नाटक अक्स तमाशा का जटिल मंचन हुआ। नाटक के सह निर्देशक टीकम जोशी जो स्वयं एक मंझे हुए कलाकार हैं। नाटक बहुत ही मनोवैज्ञानिक था। इसमें सामाजिक विसंगतियों और मानसिक संघर्षों को प्रभावशाली नाटकीय ढंग से प्रस्तुत किया है। यह नाटक दर्शकों का केवल मनोरंजन नहीं करता, बल्कि दर्शकों को विमर्श व आत्मचिंतन के लिए व्याकुल करता है।
यह नाटक ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित चंद्रशेखर कंबार के प्रसिद्ध कन्नड़ नाटक सीरी सिम्पिगे का हिंदी रूपांतरण है, जिसका अनुवाद वरिष्ठ रंगकर्मी प्रो. राम गोपाल बजाज ने किया है। यह नाटक लोककथा जैसी शैली के माध्यम से भ्रम और सत्य की पड़ताल करता है। नाटक दो जुड़वाँ पात्रों एक नाग नाथ दूसरा राजकुमार के माध्यम से अपने विषयों को व्यंग्यात्मक और प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। यह नाटक आधुनिक दर्शकों के बीच जटिल विचारों को प्रभावशाली व मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करता है।
मंचन की दृष्टि से यह एक चुनौतीपूर्ण नाटक है। इसमें प्रकाश और मंच सज्जा का उपयोग करके दोनों पात्रों के द्वंद्व को दिखाया गया है।
यह एक प्रयोगात्मक शैली का नाटक है, जो पारंपरिक नाटकों से अलग और प्रभावशाली है। नाटक के एक्टिंग ट्रेनर का कार्य सुप्रसिद्ध रंगकर्मी समीप सिंह ने किया हैं। युवा रंगकर्मी कृति वी शर्मा द्वारा वस्त्र सज्जा नाटक को खास और भाव्य बनाती है। स्त्री पात्रों में राजकुमार की राज माता व रानी का किरदार भी बहुत प्रभावी है। इस नाटक ने दर्शकों में एक अलग प्रभाव छोड़ता है। मंचन के इस मौके पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक सुप्रसिद्ध रंगकर्मी व फ़िल्मकार माननीय प्रो चितरंजन त्रिपाठी और रंगमंडल प्रमुख राजेश सिंह के साथ सैकड़ो रंगकर्मी दर्शकद्रीघा में उपस्थित थे।
