भोरे और बैकुंठपुर में जश्न का माहौल, समर्थकों ने मनाया उत्सव।
प्रशासनिक कार्यों में तेजी और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की आस।
जिले के युवाओं और किसानों ने मंत्रियों से लगाई बड़ी उम्मीदें।
नितिन गुप्ता/प्रणव दुबे
गोपालगंज: जिला वासियों के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। सूबे के नए मंत्रिमंडल विस्तार में गोपालगंज ने अपनी धाक जमाते हुए एक नहीं, बल्कि दो-दो मंत्री पद हासिल किए हैं। भोरे विधानसभा से विधायक *सुनील कुमार* और बैकुंठपुर के विधायक मिथिलेश तिवारी ने जैसे ही मंत्री पद की शपथ ली, पूरा जिला ‘जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। जगह-जगह पटाखे फोड़े गए और मिठाइयां बांटकर लोगों ने अपनी खुशी का इजहार किया।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को गोपालगंज के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है। जिले को एक साथ दो कैबिनेट मंत्री मिलना न केवल क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को मजबूती देता है, बल्कि सत्ता के गलियारों में जिले की आवाज को और बुलंद करता है। अब तक विकास की राह देख रहे सुदूर इलाकों के ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनके अपने प्रतिनिधि अब सीधे नीति-निर्धारण में शामिल होंगे, जिससे क्षेत्र की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकेगा।
विकास और रोजगार की नई उम्मीद
स्थानीय निवासियों का मानना है कि इन दो नियुक्तियों से जिले में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। सबसे बड़ी उम्मीद युवाओं को है; रोजगार के नए अवसर पैदा करने और बंद पड़ी चीनी मिलों या उद्योगों को पुनर्जीवित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। लोगों को विश्वास है कि सुनील कुमार का अनुभव और मिथिलेश तिवारी की सक्रियता मिलकर गोपालगंज को बिहार के अग्रणी जिलों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।
क्या अब बदलेगी गोपालगंज की तस्वीर?
यह सवाल अब हर आम और खास की जुबान पर है। दो मंत्रियों के होने का सीधा अर्थ है—दुगनी ताकत और दुगना बजट। प्रशासन और सरकार के बीच अब गोपालगंज का सेतु पहले से कहीं अधिक मजबूत है। यदि दोनों मंत्री समन्वय के साथ काम करते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब गोपालगंज ‘पिछड़ेपन’ का टैग हटाकर ‘विकास के मॉडल’ के रूप में उभरेगा। जिला वासियों की निगाहें अब अपने इन ‘दिग्गजों’ की कार्यशैली और आने वाली योजनाओं पर टिकी हैं।
