प्रणव कुमार अभय,नई दिल्ली
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के व्याकरण विभाग के प्रो ब्रजभूषण ओझा को व्याकरण शास्त्र में उनकी उत्कृष्ट विद्वता के लिए पण्डितराज की प्रतिष्ठित उपाधि से शताब्दियों बाद सम्मानित किया गया। यह सम्मान पणिनीय शोधसंस्थानम्, विलासपुर छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदान किया गया। सम्मान के रूप में प्रमाण पत्र के साथ चांदी का मुकुट पहनाया गया। चांदी के मुकुट पर पण्डितराज आचार्य ब्रजभूषण ओझा नाम अंकित किया गया है। डॉक्टर ओझा बिहार के गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के सिंसई गांव के निवासी रामेश्वर ओझा व ज्ञांती देवी के पुत्र हैं।
समारोह में छत्तीसगढ़ के विधायक व पूर्व राज्यमंत्री श्री अमर अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहें। वहीं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी मुख्य अतिथि तथा साहित्यकार केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो राधाबल्लभ त्रिपाठी जी सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहें। यह सम्मान पणिनीय शोधसंस्थान की अध्यक्षा एवं व्याकरण शास्त्र की वरिष्ठ विश्व प्रसिद्ध विदुषि राष्ट्रपति सम्मानित प्रो पुष्पा दीक्षित ने दिया।
इस अवसर पर प्रो ओझा पौष्पी पणिनि प्रक्रिया का विश्वपरिचय पर अपना विशिष्ट व्याख्यान दिया।
इस व्याख्यान से पौष्पी प्रक्रिया के महत्व समाज में प्रतिस्ठापित हुई। पण्डितराज की काशी में शातब्दियों बाद किसी को प्राप्त हुआ। इससे पूर्व भी प्रो ओझा को राष्ट्रपति सम्मान, शास्त्रकलानिधि, अमिनपतंजली, व्याकरणभूषण इत्यादि दर्शनो पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। इस सम्मान की घोषण पर संकाय के संकाय प्रमुख प्रो राजाराम शुक्ल, सम्मपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो एके त्यागी आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की।
