डॉ सत्य प्रकाश तिवारी
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने राज्य में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि शराबबंदी की मंशा भले ही समाज सुधार की रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर यह नीति पूरी तरह विफल साबित हो रही है। मांझी के अनुसार, यह कानून अब कागजों पर तो आदर्श नजर आता है, मगर हकीकत में इसने गरीबों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और माफियाओं को फलने-फूलने का मौका दे दिया है।
मांझी ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई का मुख्य निशाना अक्सर दिहाड़ी मजदूर और कमजोर वर्ग के लोग बनते हैं, जो छोटे-मोटे मामलों में गिरफ्तार होकर लंबे समय तक जेल काटते हैं। इससे उनके परिवारों की आर्थिक कमर टूट रही है। इसके विपरीत, बड़े शराब माफिया और संगठित गिरोह बिना किसी डर के अपना अवैध साम्राज्य चला रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि माफियाओं द्वारा यूरिया और जहरीले रसायनों से बनाई जा रही अवैध शराब ग्रामीण इलाकों में युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है, जो कि प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की नई सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील की है कि वे इस संवेदनशील कानून की व्यावहारिक समीक्षा करें। उन्होंने सुझाव दिया कि शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए इसमें पारदर्शिता और संतुलन लाने की जरूरत है ताकि राजस्व के नुकसान को कम किया जा सके और निर्दोष लोग प्रताड़ित न हों। मांझी ने स्पष्ट किया कि वे शराबबंदी के विरोध में नहीं हैं, बल्कि इसके लागू करने के दोषपूर्ण तरीके में सुधार चाहते हैं, ताकि कानून का शिकंजा असली अपराधियों पर कसा जा सके।
