नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने के बाद देश भर में हलचल मच गई है। एक ओर जहां टॉपर्स अपनी सफलता का परचम लहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छात्रों का एक बड़ा वर्ग अपनी मार्कशीट देखकर गहरे सदमे और अवसाद की स्थिति में है। इस वर्ष परिणामों के साथ जो सबसे बड़ा विवाद जुड़ा है, वह है बोर्ड की नई ‘डिजिटल मूल्यांकन’ (Digital Evaluation) तकनीक। सैकड़ों मेधावी छात्रों ने आरोप लगाया है कि इस प्रणाली की तकनीकी खामियों और मानवीय लापरवाही के कारण उनके अंक उनकी वास्तविक क्षमता और मेहनत के मुकाबले बेहद कम आए हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) इस समय छात्रों के आक्रोश का मुख्य केंद्र बना हुआ है। #CBSE, #JusticeForStudents और #Results2026 जैसे हैशटैग के साथ छात्र अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और बोर्ड से जवाब मांग रहे हैं। कई छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के अनुमानित स्कोर और प्राप्त अंकों के बीच के भारी अंतर को उजागर करते हुए मार्कशीट के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने साल भर दिन-रात एक कर पढ़ाई की थी और स्कूल की प्री-बोर्ड परीक्षाओं में भी उनका प्रदर्शन अव्वल रहा था, लेकिन बोर्ड के नतीजों ने उनके भविष्य के सपनों पर पानी फेर दिया है।

हैरानी की बात यह है कि कई छात्रों ने उन विषयों में भी बहुत कम नंबर मिलने का दावा किया है, जिनमें वे शत-प्रतिशत सही उत्तर लिखकर आए थे। विशेषज्ञों और शिक्षकों का भी मानना है कि डिजिटल जांच के दौरान तकनीकी ‘ग्लिच’ या सॉफ्टवेयर की त्रुटियों के कारण अंकों की गणना में गड़बड़ी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस विसंगति ने न केवल छात्रों को मानसिक तनाव में डाल दिया है, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख संस्थानों में होने वाले आगामी एडमिशन को लेकर भी उनकी चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, छात्र और अभिभावक एकजुट होकर सीबीएसई से इस मामले में पारदर्शिता बरतने और पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।

By नवप्रभा टाइम्स

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