नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार दुबे

बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देशव्यापी स्तर पर ठगी करने वाले एक बेहद शातिर और हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ किया है यह गिरोह सीधे-साधे और अमीर लोगों को झांसा देकर सादे कागज को विशेष केमिकल्स और हाथ की सफाई से असली नोट में बदलने का दावा करता था और रकम को दोगुना-तिगुना करने का लालच देकर करोड़ों की ठगी करता था। गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) को मिली गुप्त सूचना के आधार पर एसडीपीओ राजेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष एसआईटी (SIT) का गठन किया गया जिसने बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के सिंगासनी गांव में देर रात एक मकान पर अचानक छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से ₹500 के नोटों की गड्डियों के रूप में करीब ₹95 लाख की भारी-भरकम राशि बरामद की है जिसमें कुछ जाली नोट होने की भी आशंका जताई जा रही है इसके साथ ही पुलिस को वहां से नोटों के आकार में कटे हुए सफेद कागजों का बंडल रंग बदलने वाला विशेष एसिड, जादुई पाउडर, केमिकल्स और नोट गिनने वाली एक ऑटोमेटिक मशीन भी मिली है इस अंतरराज्यीय रैकेट में शामिल 8 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है जो पश्चिम बंगाल के वर्धमान, पूर्वी चंपारण, सारण, सीवान और स्थानीय बैकुंठपुर के रहने वाले है पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड वर्धमान का फरहद हुसैन और डेमो देने वाला मुख्य सरगना कमाल खान है जो लोगों को मोतिहारी और नेपाल के बड़े होटलों में ले जाकर लाइव डेमो दिखाते थे इस बार उन्होंने सारण के एक बड़े कपड़ा व्यवसायी नंदकिशोर राय को उनके समधी के जरिए पैसे दोगुने करने के जाल में फंसाया था व्यवसायी अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई इन ठगों के हवाले करने ही वाले थे कि गोपालगंज पुलिस ने समय रहते इस बहुत बड़ी ठगी और जालसाजी को पूरी तरह नाकाम कर दिया

इसके साथ ही गोपालगंज पुलिस ने जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के जिगना गांव में बीते 3 मई को हुई एक मूक-बधिर (बोलने और सुनने में असमर्थ) युवक संतोष कुमार की सनसनीखेज हत्या के मामले का भी हैरान कर देने वाला खुलासा किया है शुरुआत में इस मामले में मृतक के सगे भाई रामकिशोर यादव ने भूमि विवाद का पुराना बहाना बनाकर अपने ही तीन निर्दोष पड़ोसियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी जिसके आधार पर पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया था लेकिन जब पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर गहराई से जांच की तो परतें खुलती चली गईं और खुद शिकायतकर्ता भाई ही इस पूरी हत्या का मुख्य साजिशकर्ता निकला दरअसल रामकिशोर यादव का अपनी पत्नी के साथ भाई के विवाद को लेकर काफी समय से मनमुटाव चल रहा था और वह अपने भाई को रास्ते से हटाकर उन तीन पड़ोसियों को हत्या के इस झूठे मुकदमे में फंसाना चाहता था ताकि जेल जाने के बाद वह उनकी कीमती जमीन पर आसानी से कब्जा कर सके इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने के लिए उसने अपने दोस्त राजकिशोर सिंह को शामिल किया था जो अवैध हथियार लेकर आया और वारदात वाली रात मूक-बधिर भाई को गोली मार दी साजिशकर्ता भाई ने गोली लगने के बाद करीब आधे घंटे तक तड़पते हुए भाई की मौत का इंतजार किया और जब उसे यकीन हो गया कि वह मर चुका है तब उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए सूचना दी गोपालगंज पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में प्रयुक्त कट्टा और जिंदा कारतूस बरामद कर दोनों असली गुनहगारों (सगे भाई रामकिशोर और शूटर राजकिशोर) को सलाखों के पीछे भेज दिया है वहीं इस मामले में बिना किसी ठोस सबूत के केवल नामजदगी के आधार पर निर्दोष ग्रामीणों को जेल भेजने और वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की सही जानकारी न देने के गंभीर आरोप में मीरगंज थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

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