नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार
पश्चिम बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है, जिससे हुगली जिले के चंदननगर नगर निगम में टीएमसी का बोर्ड पूरी तरह से भंग हो गया है यहां निवर्तमान मेयर राम चक्रवर्ती के नेतृत्व में पार्टी के 31 में से 30 पार्षदों ने एकजुट होकर सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। 32 साल पुराने इस ऐतिहासिक नगर निगम में कुल 33 सीटें है, जिसमें टीएमसी के पास पूर्ण बहुमत था, लेकिन इस भारी बगावत के बाद अब इन सभी पार्षदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इस टूट के बाद निगम में अब केवल एक टीएमसी और दो वामपंथी पार्षद ही बचे हैं, जिन्होंने अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया है
इस बड़े सियासी घटनाक्रम की पटकथा शुक्रवार को दो चरणों में लिखी गई, जब सुबह के वक्त पहले पांच पार्षदों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए अपने इस्तीफे सौंपे और फिर उसी रात 25 अन्य पार्षदों ने भी सामूहिक रूप से अपने पद छोड़ दिए ,सामूहिक इस्तीफे के बाद निवर्तमान मेयर राम चक्रवर्ती ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भी वे नागरिकों को अपनी सेवाएं देना जारी रखना चाहते थे, लेकिन शहरी विकास विभाग द्वारा जारी एक नए निर्देश ने उनके हाथ पूरी तरह बांध दिए ,इस निर्देश के तहत नगर निगम के खर्चों के ऑडिट की बात कही गई थी, जिसके बाद बोर्ड के पास कोई वित्तीय स्वायत्तता नहीं बची , हालत यह हो गई थी कि निगम प्रशासन चाय या गाड़ियों के ईंधन जैसे रोजमर्रा के छोटे-मोटे बुनियादी खर्चों के लिए भी फंड जुटाने में पूरी तरह लाचार हो गया था
निवर्तमान मेयर ने साफ किया कि कुछ दिनों तक इस घुटन भरे हालात में इंतजार करने के बाद जब उन्हें महसूस हुआ कि पद पर बने रहने से नागरिकों के विकास कार्यों में बाधा आ रही है, तब उन्होंने यह कड़ा फैसला लिया ,उन्होंने कहा कि जब वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं और उनके लिए कोई काम ही नहीं कर पा रहे हैं, तो महज अपनी कुर्सियों से चिपके रहने का कोई औचित्य नहीं बनता था और उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह फैसला पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी ने भी उन पर इस्तीफा देने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया था, गौरतलब है कि चंदननगर नगर निगम में अगला चुनाव साल 2027 में होना तय था, लेकिन इस अप्रत्याशित सामूहिक इस्तीफे ने समय से पहले ही वहां टीएमसी के एक बड़े राजनीतिक किले को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
