प्रणव कुमार दुबे
नेपाल के ऊपरी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश तथा भीषण प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ का रूप धारण कर लिया है। इस जल-प्रलय और तेज धार की चपेट में आने से कई मासूम लोगों की अकाल मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों घर, मकान और पूरी-पूरी बस्तियां जमींदोज होकर बह गई हैं। नेपाल की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं, जिससे हजारों जिंदगियां बेघर हो चुकी हैं और पूरे देश का जनजीवन, यातायात तथा प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में भारी तबाही मचाने के बाद यह विकराल जलराशि अब भारत के निचले मैदानी इलाकों की ओर रुख कर चुकी है और गंडक नदी के जरिए बिहार के गोपालगंज जिले में बेहद तेज रफ्तार से दाखिल हो रही है। हालांकि, जहां एक तरफ नेपाल में इस पानी के साथ केवल बर्बादी, त्रासदी और तबाही का खौफ आया है, वहीं गोपालगंज के निचले तथा तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए गंडक का यह बढ़ा हुआ जलस्तर अचानक आजीविका और तुरंत कमाई का एक बड़ा व अप्रत्याशित जरिया बन गया है।
नेपाल की ओर से गंडक नदी में अचानक बढ़े इस विशाल जलप्रवाह के साथ-साथ वहां के बड़े प्राकृतिक जलाशयों, झीलों और मत्स्य पालन केंद्रों से भारी तादाद में बड़ी-बड़ी मछलियां बहकर गोपालगंज तक पहुंच रही हैं। नेपाल के ऊपरी इलाकों से पानी के प्रचंड बहाव के साथ बहकर आ रही इन मछलियों के कारण गोपालगंज सीमा क्षेत्र में गंडक नदी के अंदर मछलियों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है, जहां 5 किलो से लेकर 30 किलो तक की विशालकाय मछलियां पानी की सतह पर साफ तैरती दिख रही हैं।
जैसे ही गंडक के किनारे बसे गांवों के मछुआरा समाज को नदी में नेपाल से भारी संख्या में कीमती और बड़ी मछलियां बहकर आने की खबर मिली, पूरे इलाके में जबरदस्त हलचल मच गई। देखते ही देखते आसपास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों मछुआरे अपने-अपने महाजाल, नावें, कांटे, जाल और बड़ी-बड़ी टोकरियां लेकर गंडक नदी के विभिन्न घाटों की ओर दौड़ पड़े। केवल कुछ ही घंटों के भीतर नदी के तमाम प्रमुख घाटों और मुहानों पर जाल फेंकने तथा मछलियां पकड़ने वाले लोगों का विशाल जमावड़ा लग गया।
स्थानीय मछुआरे नदी की खतरनाक और उफनती धाराओं की परवाह किए बिना अपनी जान जोखिम में डालकर घंटों तक गहरे पानी में उतरकर जाल डाल रहे हैं। उफनते पानी के बीच की जा रही यह कड़ी मशक्कत पूरी तरह रंग ला रही है और मछुआरों के जालों में रोहू, कतला, बोआरी, मांगुर और बिगहेड जैसी कीमती तथा विशालकाय प्रजातियों की मछलियां भारी मात्रा में फंस रही हैं, जिन्हें मछुआरे सुरक्षित रूप से किनारे लाकर टोकरियों में इकट्ठा कर रहे हैं।
नदी से निकाली जा रही इन भारी-भरकम मछलियों को तट पर जमा करने के तुरंत बाद स्थानीय थोक मंडियों, हाट-बाजारों और आसपास के शहरी क्षेत्रों में ऊंची कीमतों पर बेचने के लिए भेजा जा रहा है। पिछले कई महीनों से सुस्त पड़े मछली कारोबार और ठप पड़ी रोजी-रोटी में अचानक आई इस अप्रत्याशित तेजी से मछुआरों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे एक ही दिन में पूरे महीने भर के बराबर कमाई कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।
मछुआरों और ग्रामीणों का मानना है कि जलस्तर में अचानक हुई इस भारी बढ़ोतरी से बाढ़ आने और नदी के कटाव का खतरा तो हमेशा सिर पर मंडराता रहता है, लेकिन इस भयानक आपदा के बीच इतनी बड़ी संख्या में कीमती मछलियों का मिलना उनके लिए किसी दैवीय वरदान से कम नहीं है। सालों बाद गंडक नदी में इस तरह का दुर्लभ नजारा देखने को मिला है, जहां मछलियों को पकड़ने के लिए किसी खास जद्दोजहद की जगह बस सही जगह जाल बिछाकर थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा है।
गंडक नदी के इस रौद्र रूप और उसके साथ बहकर आ रही विशालकाय मछलियों के इस अनोखे नजारे को देखने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से ग्रामीणों की भारी भीड़ नदी तट पर उमड़ रही है। गंडक के मुहाने पर बना यह माहौल एक तरफ जहां नेपाल की भयावह त्रासदी और आपदा के खौफ को बयां करता है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय मछुआरा समुदाय के लिए लंबे समय से चली आ रही आर्थिक तंगी को दूर करने की एक नई उम्मीद और संबल भी दे रहा है।
दूसरी ओर, स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गोपालगंज जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने गंडक नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से तटवर्ती इलाकों में मुनादी कराकर मछुआरों और आम ग्रामीणों से उफनती नदी के गहरे पानी में न जाने तथा सतर्कता बरतने की सख्त हिदायत दी गई है, हालांकि अपनी आजीविका संवारने की होड़ में मछुआरे अब भी गंडक के मुहाने पर डटे हुए हैं।
