यश पांडेय

बिहार में मानसून की निरंतर वर्षा और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से नदियों में लगातार छोड़े जा रहे भारी जलप्रवाह ने पूरे राज्य में बाढ़ की स्थिति को अत्यंत भयावह और विकराल बना दिया है। गंगा, सोन, गंडक, बागमती, बुढ़ी गंडक और कोसी जैसी राज्य की प्रमुख नदियाँ पूरे उफान पर हैं और कई स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज धारा के कारण तटीय तथा निचले इलाकों में पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है, जिससे राज्य के एक विशाल भूभाग पर जल प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।

इस भयंकर प्राकृतिक आपदा का दायरा प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिसकी चपेट में आकर राज्य के 12 प्रमुख जिले इस समय जलमग्न हो चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन प्रभावित जिलों के 50 से अधिक प्रखंडों के सैकड़ों गाँव और टोले पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। इस तबाही के कारण लगभग 10 लाख की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। गाँवों का मुख्य सड़कों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, रिहायशी मकान जलमग्न हो चुके हैं और हजारों परिवार अपना सब कुछ छोड़कर ऊंचे स्थानों, राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे ट्रैक और तटबंधों पर शरण लेने को विवश हैं।

हालात की अत्यधिक संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को त्वरित राहत पहुंचाने और उनके जीवन की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की 15 विशेष टीमों को सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। ये प्रशिक्षित टीमें आधुनिक जीवनरक्षक उपकरणों और मोटरबोट्स के माध्यम से दिन-रात दूरदराज के डूब चुके इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं तथा फंसे हुए बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मवेशियों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचा रही हैं।

विस्थापन और बर्बादी के इस दौर में बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भोजन और पीने के शुद्ध पानी की बनी हुई है। इस मानवीय संकट से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा प्रभावित इलाकों में व्यापक पैमाने पर राहत अभियान चलाया जा रहा है। वर्तमान में राज्य के विभिन्न प्रभावित प्रखंडों में 36 सामुदायिक रसोई का निर्बाध संचालन किया जा रहा है। इन रसोइयों के माध्यम से अब तक 1.14 लाख से अधिक पीड़ित और बेघर लोगों को दो समय का गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है, ताकि संकट की इस कठिन घड़ी में कोई भी पीड़ित व्यक्ति भूखा न रहे।

सड़क संपर्क पूरी तरह ध्वस्त हो जाने के कारण जलमग्न क्षेत्रों में आवागमन और राहत सामग्री के वितरण का एकमात्र जरिया केवल नावें ही बची हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही को सुचारू बनाए रखने और सूखा राशन, पीने का शुद्ध पानी व तिरपाल जैसी जरूरी सामग्री घर-घर तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 912 सरकारी व निजी नावों को राहत कार्य में लगा दिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी स्वयं नावों के जरिए दूरस्थ इलाकों का दौरा कर राहत वितरण कार्य की जमीनी स्तर पर सीधी निगरानी कर रहे हैं।

बाढ़ के दौरान दूर-दराज के गाँवों में अचानक किसी के गंभीर रूप से बीमार होने या चिकित्सीय आपात स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत मदद पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को भी जलमार्ग से जोड़ा गया है। पानी के रास्तों पर निर्बाध परिचालन के लिए 19 विशेष मोटरबोट एंबुलेंस को तैनात किया गया है। ये मोटरबोट एंबुलेंस चौबीसों घंटे जलमार्गों पर गश्त कर रही हैं और बाढ़ के पानी में घिरे गंभीर मरीजों, प्रसूताओं और घायलों को तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों तक पहुंचाने का बेहद महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।

जलभराव के कारण क्षेत्रों में दूषित पानी के जमाव से महामारी और संक्रामक बीमारियों के तेजी से फैलने का बड़ा जोखिम बना रहता है। इस खतरे को समय रहते टालने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित जिलों में 50 विशेष चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की समर्पित टीमें लगातार तैनात हैं, जो मरीजों की नि:शुल्क जांच कर रही हैं। इसके साथ ही बाढ़ पीड़ितों के बीच ओआरएस के पैकेट, जलशोधन की दवाएं , ब्लीचिंग पाउडर और आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयां वितरित की जा रही हैं।

मानवीय आबादी के साथ-साथ बाढ़ के पानी ने लाखों बेजुबान मवेशियों के जीवन पर भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में हरे चारे का अकाल पड़ गया है और पशुओं के रहने वाले स्थान पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए सूखा चारा, टीकाकरण और आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं का प्रबंध किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की पशु जनित महामारी को फैलने से रोका जा सके।

नदियों के मौजूदा जलस्तर और मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमानों को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण होने की आशंका जताई जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन पल-पल की स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकतानुसार राहत कार्यों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आपदा के इस कठिन समय में हर एक पीड़ित परिवार तक सरकारी सहायता बिना किसी विलंब के पहुंचे, किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके और स्थिति को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जा सके।

By नवप्रभा टाइम्स

*नवप्रभा टाइम्स ख़बरें की दुनिया एक भारत में विस्तार के लिए सदैव तत्पर है, बिहार व उत्तर प्रदेश से आधारित समाचार और समसामयिकी चैनल है।[1] अपने भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, और भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं पर एक अद्यतन प्रदान करता है।[2] यह सेवा ऑनलाइन और इसके मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रसारित की जाती है। यह 15 जून 2020 से सेवा प्रदान किया जा रहा है। न्यूज़ पोर्टल न्यूज़ चैनल, व राजनीतिक साक्षात्कार, सामाजिक साक्षात्कार, के माननीय दर्शक हमारे ग्राहक है।‌ हमारा कौशल विविध भारतीय भाषाओं में त्वरित गति से खबर देने के लिए सदैव गतिशील है। साप्ताहिक साक्षात्कार के साथ साथ सामाजिक सेवा प्रसारण के उद्देश्य को प्रकाशित करने हेतु हमारे चैनल सर्विस प्रदान कर रहे इस दृष्टि से यह संस्था भारतीय भाषाओं की आवाज बन रही हैं।पत्रकारीय मूल्यों के साथ-साथ लोकतंत्र को परिष्कृत करने में भी हमने यथासंभव अपनी भूमिका निभाई है। करोना काल के दिनों में मानव रक्षा के लिए समाचार की जो भूमिका रही है, वह हमारा स्वर्णिम इतिहास है। निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के चलते नवप्रभा टाइम्स समाचार सत्ता प्रतिष्ठान का कोपभाजक बनता रहा है लेकिन, हमारा लक्ष्य ‘लोकतंत्र का परिष्कार और पुरस्कार’ रहा है।* सौजन्य: नवप्रभा टाइम्स जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed