संवाददाता पटना

बिहार की शिक्षा व्यवस्था को एक नई गति देने और परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को पूरे देश में सबसे तीव्र एवं आधुनिक बनाने के उद्देश्य से राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी ऐलान किया है। राजधानी पटना के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बड़ा बयान दिया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने अब यह स्पष्ट लक्ष्य तय किया है कि मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा समाप्त होने के महज 7 दिनों यानी एक सप्ताह के भीतर ही परिणाम जारी कर दिए जाएं। उनके इस ऐतिहासिक ऐलान के बाद से ही पूरे राज्य के शैक्षणिक गलियारों, लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने राज्य के समर्पित शिक्षकों के अमूल्य योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की और साथ ही बिहार के भावी शैक्षणिक विज़न का विस्तृत खाका देश के सामने रखा। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि बिहार अब पुरानी और सुस्त प्रशासनिक व्यवस्थाओं का शिकार रहने वाला राज्य नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक तकनीक, मजबूत इच्छाशक्ति और त्वरित सुधारों के बल पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 7 दिनों के भीतर मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट जारी करने का यह लक्ष्य केवल एक मौखिक घोषणा नहीं है, बल्कि इसे अमलीजामा पहनाने के लिए शिक्षा विभाग और बिहार बोर्ड के स्तर पर एक विस्तृत, चरणबद्ध और अभेद्य कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

यदि बिहार सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अपने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को धरातल पर उतारने में सफल हो जाते हैं, तो यह भारतीय शिक्षा प्रणाली के पूरे इतिहास में एक स्वर्णिम और अभूतपूर्व अध्याय के रूप में दर्ज होगा। वर्तमान समय में भारत का कोई भी राज्य शिक्षा बोर्ड अथवा केंद्रीय बोर्ड इतने विशाल पैमाने पर आयोजित होने वाली 10वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम इतने कम समय में जारी करने की स्थिति में नहीं है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि बिहार को न केवल परीक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाएगी, बल्कि पूरे देश के सामने एक ऐसा मानक स्थापित करेगी जिसका अनुकरण करना अन्य राज्यों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होगी।

अगर वर्तमान व्यवस्था और पिछले वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पहले से ही देश भर में सबसे पहले बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने और रिकॉर्ड समय में सटीक नतीजे घोषित करने के लिए अपनी एक अलग पहचान बना चुकी है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान बोर्ड ने अपनी कार्यप्रणाली में लगातार तकनीकी सुधार करते हुए परीक्षा समाप्ति के 20 से 30 दिनों के भीतर परिणाम घोषित कर बाकी सभी राज्य बोर्डों को काफी पीछे छोड़ दिया था। हालांकि, अब इस समयसीमा को और घटाकर सीधे महज एक सप्ताह के भीतर सीमित करने का फैसला एक बेहद साहसिक कदम है, जो बिहार बोर्ड की दक्षता, साख और सांख्यिकीय प्रबंधन को एक नए अंतरराष्ट्रीय मुकाम पर पहुंचाएगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस दूरगामी निर्णय के केंद्र में राज्य के लाखों छात्रों का व्यापक हित, उनका बहुमूल्य समय और उनका तनावमुक्त शैक्षणिक भविष्य है। अक्सर बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद महीनों तक रिजल्ट का इंतजार करने से विद्यार्थियों का काफी समय व्यर्थ नष्ट हो जाता था और वे अपनी आगे की करियर योजना तथा उच्च शिक्षा को लेकर लगातार मानसिक अनिश्चितता के दौर से गुजरते थे। परिणाम महज 7 दिनों के भीतर आ जाने से छात्र बिना किसी अतिरिक्त तनाव या समय गंवाए 11वीं कक्षा में अपना नामांकन तुरंत सुनिश्चित कर सकेंगे। इससे उनका शैक्षणिक सत्र पूरी तरह समय पर शुरू होगा और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी भरपूर समय मिल सकेगा।

इतने विशाल स्तर पर देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक के लाखों परीक्षार्थियों की कॉपियों की जांच करना, उनका सत्यापन करना और शून्य त्रुटि के साथ 7 दिनों में डिजिटल अंकपत्र तैयार करना एक बहुत ही जटिल एवं चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस अति-महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पाने के लिए परीक्षा बोर्ड अपनी पूरी मूल्यांकन और परिणाम निर्माण प्रक्रिया को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है। इसके अंतर्गत हाई-स्पीड कंप्यूटरीकृत बारकोडिंग, अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड डेटा प्रोसेसिंग सर्वर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और डायरेक्ट डिजिटल मार्क्स एंट्री जैसी तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मानवीय गलतियों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में उपस्थित राज्य भर से आए जाने-माने शिक्षाविदों, विद्यालयों के प्राचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों ने उपमुख्यमंत्री के इस क्रांतिकारी प्रस्ताव का करतल ध्वनि से जोरदार स्वागत किया। समारोह में मौजूद विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े और समयबद्ध लक्ष्यों से संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र में कार्य करने की गति, पारदर्शिता और जवाबदेही कई गुना बढ़ जाती है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इतने कम समय में 100% सटीक और पारदर्शी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन केंद्रों पर उच्च स्तरीय समन्वय, निर्बाध डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉपियों की जांच करने वाले शिक्षकों का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण बेहद आवश्यक होगा।

निष्कर्षतः, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह ऐलान बिहार की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था के लिए एक नया इतिहास रचने की दिशा में उठाया गया एक बेहद दूरदर्शी और क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। यह नई व्यवस्था यदि आगामी मैट्रिक परीक्षा में सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह न केवल बिहार बोर्ड के प्रति देश भर में सम्मान, विश्वास और साख को कई गुना बढ़ाएगी, बल्कि उन लाखों होनहार छात्रों के सपनों को भी एक नई रफ्तार और उड़ान देगी जो बेहतर भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब पूरे राज्य और देश की निगाहें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की अगली कार्ययोजना पर टिकी हैं कि वह इस अभूतपूर्व संकल्प को किस प्रकार धरातल पर साकार करती है।

By नवप्रभा टाइम्स

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