नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार

नई दिल्ली,5 सितंबर,2026 अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ आईएईए द्वारा साक्षरता को केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित न रखते हुए इसे स्वच्छता, नशामुक्ति, डिजिटल जागरूकता, वित्तीय समझ, कानूनी जानकारी, लैंगिक संवेदनशीलता, कौशल विकास और आजीवन सीखने से जोड़कर व्यापक जनभागीदारी अभियान चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य समुदायों तक शिक्षा और जागरूकता का व्यावहारिक लाभ पहुँचाने के साथ स्पष्ट एवं परिणाम-आधारित उपलब्धियाँ हासिल करना है इसके तहत कम से कम 10 समुदायों में प्रत्यक्ष रूप से अथवा समझौता-ज्ञापन से जुड़े सहयोगी संस्थानों के माध्यम से विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

जिनके जरिए 100 से अधिक लोगों को साक्षरता के व्यापक महत्व से जोड़ा जाएगा। ‘स्वच्छता ही सेवा’ तथा ‘नशे को ना कहें, किताब को हाँ कहे’ जैसे संदेशों के माध्यम से स्वच्छ जीवनशैली, शिक्षा और सकारात्मक सोच के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। आईएईए की पहल के अंतर्गत जरूरतमंद लोगों को कंप्यूटर साक्षरता तथा कटिंग-टेलरिंग जैसे कौशल प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने के साथ वित्तीय, डिजिटल और कानूनी साक्षरता तथा लैंगिक संवेदनशीलता से संबंधित जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। इन प्रयासों का लक्ष्य शिक्षा को रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तीकरण से जोड़ना है अभियान में युवाओं को विशेष रूप से सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा और आईएईए की केंद्रीय, क्षेत्रीय तथा राज्य इकाइयों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ते हुए वंचित आबादी तक साक्षरता एवं जागरूकता का संदेश पहुँचाया जाएगा। आजीवन सीखने की अवधारणा को मजबूत करने के लिए ऐसे युवाओं की पहचान की जाएगी, जो अपने समुदाय में शिक्षा और सामाजिक चेतना के वाहक बन सकें। चयनित युवा एंबेसडरों को वरिष्ठ पेशेवरों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इस पहल से युवाओं में नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रयास होगा।

अभियान को उल्लास—नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के सामाजिक चेतना केंद्रों से जोड़कर जमीनी स्तर पर साक्षरता आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा। इसके माध्यम से शिक्षा से वंचित लोगों तक पहुँच बढ़ाने, उन्हें सीखने के अवसर उपलब्ध कराने और समाज में निरंतर ज्ञानार्जन की संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। पूरे आयोजन का केंद्र केवल गतिविधियों का संचालन नहीं, बल्कि उनके ठोस परिणाम सुनिश्चित करना होगा। समुदायों तक पहुँच, प्रतिभागियों की संख्या, कौशल प्रशिक्षण से जुड़ाव, युवाओं की भागीदारी, युवा एंबेसडरों का प्रशिक्षण तथा सामाजिक चेतना केंद्रों के साथ सहयोग जैसे मानकों के आधार पर अभियान की उपलब्धियों का आकलन किया जाए। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस को महज एक दिन के आयोजन के बजाय आजीवन सीखने, सामाजिक जागरूकता और समुदाय आधारित परिवर्तन की सतत पहल के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

By नवप्रभा टाइम्स

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