प्रणव कुमार अभय
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज नामक व्यक्ति के खिलाफ दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों के समक्ष एक अत्यंत विस्तृत, औपचारिक और कड़ा शिकायती पत्र प्रेषित किया है। यह संपूर्ण मामला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आयोजित एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता पर हुए कथित जानलेवा हमले, गंभीर मारपीट और अभद्रता से जुड़ा हुआ है। इस घटना के सार्वजनिक होते ही देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं, क्योंकि इस पूरे विवाद में मुख्य आरोपी के रूप में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम लगातार उछाला जा रहा था।
चिराग पासवान ने पुलिस प्रशासन को दी गई अपनी लिखित शिकायत में बेहद साफ, कड़े और दोटूक शब्दों में यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वतंत्र भारद्वाज नाम के इस व्यक्ति से उनका किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत, पारिवारिक, राजनीतिक या व्यावसायिक संबंध नहीं है। उन्होंने अपने जारी बयान में कहा कि एक सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन जीने के कारण प्रतिदिन देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों लोग उनसे मुलाकात करने आते हैं, मांग पत्र सौंपते हैं और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं। इसका तात्पर्य यह कतई नहीं निकाला जा सकता कि वह व्यक्ति उनका करीबी है अथवा उसे किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण या सह प्राप्त है। चिराग ने आरोपी पर उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा, छवि और पद का अनुचित इस्तेमाल करने का सीधा आरोप लगाया।
यह पूरा विवाद तब और अधिक गंभीर, संवेदनशील तथा विवादित हो गया जब इंटरनेट और तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक पॉडकास्ट साक्षात्कार का वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। इस वायरल वीडियो में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज बेहद गैर-जिम्मेदाराना ढंग से खुले तौर पर यह शेखी बघारता हुआ नजर आ रहा था कि उसने जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट की, उनका सिर फोड़ा और गंभीर रूप से घायल करने के बावजूद वह कानूनी कार्रवाई से बच निकलने में सफल रहा। इतना ही नहीं, उस डिजिटल बातचीत के दौरान आरोपी ने चिराग पासवान सहित कई अन्य शीर्ष राजनीतिक हस्तियों का नाम लेते हुए उन्हें अपना ‘बड़ा भाई’ बताया और अपने कथित रसूख व राजनीतिक पहुंच का धौंस जमाने का भरपूर प्रयास किया।
डिजिटल मीडिया पर प्रसारित इस वीडियो में आरोपी द्वारा दिए गए इन अराजक बयानों पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गहरा ऐतराज जताया और इसे देश की कानून-व्यवस्था के लिए एक खुली चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी असहाय नागरिक के साथ हिंसा करना, उसका सिर फोड़ना और फिर मीडिया के सामने आकर गर्व से कानून को ठेंगा दिखाना बेहद चिंताजनक और गंभीर अपराध है। चिराग पासवान के अनुसार, यदि ऐसे मामलों में बिना किसी देरी के त्वरित और कठोरतम कानूनी कदम नहीं उठाए गए, तो इससे समाज में न्याय प्रणाली के प्रति गलत संदेश जाएगा और अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे, जिसे कोई भी सभ्य समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता।
बिहार की राजधानी पटना में मीडियाकर्मियों से औपचारिक बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारियों से इस पूरे प्रकरण की अत्यंत निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने पुलिस प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में कहा कि जांच एजेंसियों को किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रभाव, सिफारिश या बाहरी दबाव के बिना पूरी निष्पक्षता के साथ काम करना चाहिए। चिराग पासवान का मानना है कि सच हर हाल में जनता के सामने आना चाहिए और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के कठोरतम प्रावधानों के तहत तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
पॉडकास्ट वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दलों, विशेष रूप से राष्ट्रीय जनता दल और कई सामाजिक संगठनों ने सरकार तथा केंद्रीय मंत्री पर आक्रामक रुख अपनाते हुए तीखे राजनीतिक हमले शुरू कर दिए थे। विपक्ष का आरोप था कि आरोपी को उच्च स्तर से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस उचित कानूनी कदम उठाने से कतरा रही है। विपक्षी हमलों, राजनीतिक बयानबाजी और आम जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच चिराग पासवान ने खुद आगे आकर पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई और यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे किसी भी तरह के अपराध या आपराधिक मानसिकता वाले व्यक्ति का समर्थन नहीं करते।
अपने आधिकारिक बयान में चिराग पासवान ने पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि वे न्याय की इस लड़ाई में पूरी तरह से पीड़ित पक्ष के साथ खड़े हैं। उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि मामले को दबाने या किसी भी स्तर पर लीपापोती करने की कोशिशों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। चिराग पासवान ने इस बात को दोहराया कि भारत का संविधान और कानून व्यवस्था सर्वोपरि है तथा कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी पहुंच या संपर्क कितने ही बड़े क्यों न हों, कानून के शिकंजे से बाहर नहीं रह सकता।
चिराग पासवान द्वारा आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने और राजनीतिक हलकों में बढ़ते दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की छानबीन में अत्यधिक तेजी ला दी है। पुलिस की विशेष जांच टीमों ने वायरल पॉडकास्ट वीडियो के मूल स्रोत, घटना के दिन मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, पीड़ित के मेडिकल रिपोर्ट तथा अन्य तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को पूछताछ के लिए समन जारी कर दिया गया है और जुटाए गए सबूतों के आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद दिल्ली से लेकर बिहार तक के राजनीतिक माहौल में भारी हलचल देखी जा रही है। चिराग पासवान द्वारा उठाए गए इस कड़े, पारदर्शी और त्वरित कदम की कई राजनीतिक हलकों में सराहना भी हो रही है, क्योंकि उन्होंने तुरंत स्थिति स्पष्ट कर अपनी बेदाग छवि को बरकरार रखने का काम किया है। फिलहाल पीड़ित परिवार, आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें दिल्ली पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट और अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं, जिससे यह तय होगा कि कानून का शिकंजा आरोपी के खिलाफ किस हद तक कसता है।
विवाद के गहराने के साथ ही सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में त्वरित न्याय की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि आरोपी के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। इस दबाव के बीच पुलिस प्रशासन पर भी बिना किसी पक्षपात के निष्पक्ष जांच पूरी करने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। आगामी दिनों में पुलिस द्वारा दर्ज की जाने वाली चार्जशीट और जुटाए गए सबूत ही यह तय करेंगे कि स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा किए गए दावों में कितनी सच्चाई थी और उसे इस कृत्य के लिए क्या कानूनी परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
