नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार
नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा संरक्षण और ईंधन की बचत की दिशा में एक बड़ा और अनुकरणीय कदम उठाया है. देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती मांग और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पीएम मोदी ने स्वयं के काफिले में वाहनों की संख्या को कम करने का फैसला किया है. इस साहसिक निर्णय के जरिए उन्होंने न केवल सरकारी खर्च में कटौती का संकेत दिया है, बल्कि आम जनता और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी एक स्पष्ट संदेश दिया है कि समय की मांग ‘बचत’ है।
प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी की इस अपील और पहल की प्रतिलिपि देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भेज दी गई है। पीएम ने सभी राज्यों से आग्रह किया है कि वे भी अपने स्तर पर ईंधन की बचत के लिए ठोस कदम उठाएं,इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ देश की निर्भरता को पारंपरिक ईंधन से कम करना है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक से अधिक अपनाने की भी पुरजोर अपील की है।
पीएम मोदी के इस कदम का असर अब राज्यों में भी दिखने लगा है साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री की इस पहल का स्वागत करते हुए राज्य में मंत्रियों और बड़े नेताओं के काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का निर्देश दिया है. माना जा रहा है कि योगी सरकार के इस फैसले से सरकारी स्तर पर भारी मात्रा में पेट्रोल-डीजल की बचत होगी। अन्य राज्य सरकारें भी अब इस दिशा में विचार कर रही हैं ताकि ऊर्जा संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके और दूसरी ओर, बिहार से भी बड़ी खबरें आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, बिहार सरकार पेट्रोल और डीजल को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकती है और राज्य में ईंधन की संभावित किल्लत को देखते हुए सरकार मंत्रियों और अधिकारियों के लिए ‘पेट्रोल राशनिंग’ जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है तथा इसका अर्थ यह है कि भविष्य में सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के वाहनों के लिए ईंधन की एक सीमा तय की जा सकती है, जिससे अनावश्यक खपत पर लगाम कसी जा सके।
प्रधानमंत्री की इस अपील का व्यापक असर आम जनमानस पर भी पड़ने की उम्मीद है और विशेषज्ञों का मानना है कि जब शीर्ष स्तर से इस तरह की पहल शुरू होती है, तो इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव पूरी प्रशासनिक मशीनरी और जनता पर पड़ता है , इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के सरकार के विजन को इस फैसले से नई गति मिलेगी और प्रधानमंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि सस्टेनेबल भविष्य के लिए हमें अपनी जीवनशैली और संसाधनों के उपयोग में बदलाव लाना होगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का अपने काफिले से गाड़ियों को कम करना महज एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह एक बड़े नीतिगत बदलाव की आहट है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि देश के अन्य राज्य और विभाग इस पर किस तरह अमल करते हैं तथा फिलहाल, पीएम के इस फैसले ने पूरे देश में ईंधन बचत की एक नई बहस छेड़ दी है और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाया है।
