1 साल तक सोने के गहने न खरीदें मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें तथा

अकेले कार चलाने के बजाय ‘कार-पूल’ करें विदेशी दौरों को स्थगित कर ‘स्वदेशी पर्यटन’ चुनें

पेट्रोल-डीजल की बचत को राष्ट्रीय मिशन बनाएं।

नितिन गुप्ता / प्रणव कुमार

नई दिल्ली: दुनिया के नक्शे पर गहराते युद्ध के बादलों और अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी अपील की है प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आह्वान किया है कि वे वर्तमान संकटपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए अपनी जीवनशैली में संयम बरतें तथा उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों का मुकाबला केवल सामूहिक ‘मितव्ययिता’ और ‘आत्मनिर्भरता’ से ही किया जा सकता है

सोने के मोह पर 1 साल का ‘विराम’

प्रधानमंत्री की अपील में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण बिंदु सोने की खरीद’ को लेकर रहा पीएम ने देश की जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि अगले एक साल तक सोने के गहने या आभूषण खरीदने से बचें भारत में सोने का भारी मात्रा में आयात होता है, जिसके कारण देश की मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में चला जाता है युद्ध के इस दौर में व्यापार घाटे को नियंत्रित करने के लिए पीएम ने नागरिकों से इस ‘पीली धातु’ के प्रति अपने मोह को एक साल के लिए त्यागने का आग्रह किया है, ताकि भारतीय रुपया और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिल सके।

ईंधन की बचत: मेट्रो और कार-पूलिंग पर जोर

ऊर्जा के मोर्चे पर देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम ने पेट्रोल और डीजल के उपयोग में भारी कटौती करने की सलाह दी है उन्होंने विशेष रूप से मेट्रो शहरों के निवासियों से कहा कि वे व्यक्तिगत वाहनों के बजाय **मेट्रो रेल और सार्वजनिक परिवहन** का अधिकतम उपयोग करें यदि कार का उपयोग अनिवार्य हो, तो ‘कार-पूल’ की संस्कृति को अपनाएं। पीएम ने जोर देकर कहा कि संसाधनों की एक-एक बूंद बचाना ही इस समय की सबसे बड़ी ‘देशभक्ति’ है।

विदेशी टूर से बचने की अपील

प्रधानमंत्री ने मध्य और उच्च वर्ग के नागरिकों से एक और बड़ा त्याग मांगा है उन्होंने अनुरोध किया है कि लोग अगले एक साल के लिए अपनी विदेश यात्राओं (Foreign Trips) को टाल दें,पीएम का मानना है कि विदेश यात्राओं पर खर्च होने वाला पैसा यदि देश के भीतर ही रहेगा, तो इससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिलेगी। उन्होंने कहा “भारत में अद्भुत विविधता है, एक साल अपने देश के पर्यटन स्थलों को एक्सप्लोर करें, इससे देश का पैसा देश के ही काम आएगा।”

“मितव्ययिता ही सुरक्षा कवच”

प्रधानमंत्री का यह संदेश एक स्पष्ट चेतावनी और समाधान दोनों है उन्होंने रेखांकित किया कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों में फिजूलखर्ची पर लगाम लगाना ही भारत की सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच साबित होगा। सरकार का यह मास्टरप्लान आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू बाजार को स्थिर रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है अब यह देश की जनता पर निर्भर है कि वे पीएम के इस ‘राष्ट्र-मंत्र’ को कितनी गंभीरता से अपनाते हैं।

 

By नवप्रभा टाइम्स

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