प्रणव कुमार अभय
नई दिल्ली: भारतीय पत्रकारिता जगत में जनसरोकारों की बेबाक आवाज़ बुलंद करने वाले प्रख्यात पत्रकार स्वर्गीय प्रभाष जोशी की पावन स्मृति में प्रभाष परंपरा न्यास द्वारा इस वर्ष भी एक भव्य और गरिमामयी वैचारिक समागम का आयोजन किया गया। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समेटे हुए इस भव्य ‘प्रभाष प्रसंग’ का सफल आयोजन रविवार, 12 जुलाई 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट के ठीक सामने स्थित सत्याग्रह मंडप, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। देश के बौद्धिक और पत्रकारिता जगत में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखने वाले प्रभाष परंपरा न्यास के आयोजनों का यह लगातार 17वां वर्ष रहा। इस वर्ष के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने शिरकत की, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने इस मंच की महत्ता को और बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री अर्जुन राम मेघवाल ने समाज में प्रेम और सद्भाव पर विशेष ज़ोर दिया। इससे पूर्व मुख्य वक्ता डॉ. सुदर्शन आयंगर ने अपने वक्तव्य में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की बात कही थी, जिसपर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक गंभीर प्रश्न उठाया कि यदि अतीत में हिंदू-मुस्लिम समाज में इतना ही अगाध प्रेम था, तो देश का विभाजन क्यों हुआ? इसके साथ ही उन्होंने संत कबीर की निर्वाण स्थली ‘मगहर’ का उल्लेख करते हुए कबीर के सामाजिक सद्भाव के संदेश पर भी विस्तार से चर्चा की।

पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार श्री बनवारी जी द्वारा की गई, जिनका लंबा वैचारिक अनुभव इस विमर्श को एक नई दिशा प्रदान कर गया। अपने अध्यक्षीय भाषण में वरिष्ठ पत्रकार श्री बनवारी जी ने रेखांकित करते हुए कहा कि गांधी जी जब भारत लौटे, तब देश की परिस्थितियां अत्यंत जटिल थीं। एक तरफ जहां पूरा विश्व ‘मॉडर्न स्टेट’ (आधुनिक राज्य) की ओर बढ़ रहा था, वहीं गांधी जी ने भारत को ‘रामराज्य’ (स्वराज और आत्म-निर्भरता) की अवधारणा की ओर मोड़ा, और इस विचार को स्वीकार करने वाले भारतीय बहुसंख्या में थे। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी दार्शनिक प्लेटो की विकेंद्रीकरण की विचारधारा की समीक्षा करते हुए कहा कि एक समाज के लिए यह विचार पूरी तरह से ठीक नहीं है। इस वर्ष के मुख्य आकर्षण के तौर पर आयोजित हुए स्मारक व्याख्यान के लिए सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक डॉ. सुदर्शन आयंगर को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने ‘कौमी संवादित की मधुशाला’ जैसे अत्यंत प्रासंगिक और गंभीर विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
मुख्य वक्ता डॉ. सुदर्शन आयंगर ने अपने व्याख्यान में वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज समाज में जो सांप्रदायिक द्वेष को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह हमारी मूल परंपरा और गांधी जी के विचारों से मेल नहीं खाता है। उन्होंने कहा कि गांधी जी आज भी अपनी तस्वीरों और विचारों के माध्यम से हमें सही दिशा दिखाते हैं। आज की सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम जैसे बुद्धिजीवी समाज की इन कमियों को देखकर भी अनदेखा करते हैं, तो यह बिल्कुल शुतुरमुर्ग की तरह संकट को देखकर रेत में सिर छुपाने जैसी बात होगी। उन्होंने कच्छ के हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का जीवंत उदाहरण दिया और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः’ श्लोक के साथ अपने वक्तव्य को विराम दिया। देश के वरिष्ठ पत्रकार और न्यास के प्रमुख श्री राम बहादुर राय ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर सभागार में उपस्थित सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमने हिंदी पत्रकारिता के उन मूल मूल्यों को भुला दिया है, जिन्होंने भारत की आज़ादी और नव-भारत के निर्माण में अपनी अद्वितीय भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष डाक टिकट जारी करने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार प्रकट किया।

सभागार को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि वैचारिक मंथन के इस माहौल में साहित्य और प्रलेखन के क्षेत्र की दो अत्यंत महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण भी किया गया है, जिसमें ‘स्मृति व्याख्यान 2025 पुस्तिका’ तथा पत्रकारिता के मूल्यों को सहेजती ‘पत्रकारिता का युगधर्म’ नामक पुस्तक का विमोचन शामिल रहा; इस पुस्तक में कुल 150 विचारोत्तेजक लेखों का अनूठा संग्रह है। इस वैचारिक समागम में मधुरता और सांस्कृतिक रंग घोलने के लिए प्रख्यात शास्त्रीय गायिका सुश्री कलापिनी कोमकली द्वारा विशेष रूप से भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जिसने वहां मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। न्यास के प्रमुख राम बहादुर राय के मार्गदर्शन में आयोजित हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आयोजक मनोज मिश्र और राकेश सिंह ने देश के सभी प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ पत्रकारों, विचारकों और जागरूक नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी के लिए अंत में आभार व्यक्त किया।
