प्रणव कुमार अभय नई दिल्ली
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को खास बात पता सामने आई की मामने की प्रारभिंक जांच वरीष्ठ अफसरो की एसआईटी ने की थी ,पर सच्चाई का पता लगाने व संज्ञेय अपराध होने की प्रारंभिक रिपोर्ट देने के बाद आगे की जांच एफआइआर दर्ज करके संबंधित पुलिस कर रही है। सुप्रीम कोर्ट को जब यह बात पता चली तो उसने जांच एसआइटी के उन्हीं अफसरों की देखरेख में कराने की बात कही जो प्रारंभिक जांच करने वाली एसआइटी में शामिल थे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने उप्र सरकार की ओर से पेश हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, वह निर्देश लेकर बताएं कि क्या मामले की जांच एसआइटी से कराई जा सकती है और उसमें वही अधिकारी शामिल हों जिन्होंने प्रारंभिक जांच की है, क्योंकि उन्हें केस की जानकारी है। मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित होगी और कोर्ट को अवगत कराया जाएगा। कोर्ट ने साथ ही पक्षकारों को चेतावनी दी कि वे इस मामले का राजनीतिकरण न करें। कोर्ट राजनीति की जगह नहीं है। मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच होनी चाहिए जो तार्किक परिणति पर पहुंचे।
पीठ ने पिछली सुनवाई पर उप्र सरकार व राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टस्ट को नोटिश जारी किया था और एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मागी थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान तूषार मेहता ने कहा , स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है । जांच जारी है और आठ लोग गिरफ्तारी किए जा चुके है।प्रघान न्यायाघीश ने पूछे , एसआईटी का जो की जांच कर है। मेहता ने कहा ,सच का पता लगाने को एसआईटी का गठन किया गया था और उसने प्रारभिक जांच करके रिपोर्ट दी कि संज्ञेय अपराघ बनता है। उसके बाद केस दर्ज हुआ और पुलिस जांच कर रही है।
