यश पांडेय
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राजधानी रांची में कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन के बीच बुधवार को अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस फैसले के बाद आंदोलन ने और तेज रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि जब तक सरकार और आयोग उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लेते, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि JPSC की भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी, परीक्षा प्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, कई बार ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। किसी ठोस पहल के अभाव में अब उन्होंने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाने का फैसला लिया है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, अधिकतम आयु सीमा में छूट, लंबित परीक्षाओं और परिणामों को समयबद्ध तरीके से जारी करना तथा भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना शामिल है। छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल कुछ अभ्यर्थियों की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों की है।
भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद भी यदि परीक्षा और चयन निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठते रहेंगे तो युवाओं का व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उधर, अनशन शुरू होने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। आंदोलन स्थल और JPSC कार्यालय के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
इस आंदोलन को अब विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विपक्षी दलों का समर्थन भी मिलने लगा है। ऐसे में यह मामला केवल JPSC तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की राजनीति का भी अहम मुद्दा बनता जा रहा है।
फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और आयोग की अगली पहल पर टिकी हैं। यदि जल्द ही वार्ता के जरिए समाधान नहीं निकला, तो रांची से शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे झारखंड में और व्यापक रूप ले सकता है। वहीं अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि अब वे केवल मौखिक आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि लिखित और ठोस निर्णय के बाद ही अपना आंदोलन समाप्त करेंगे।
