प्रणव कुमार दुबे।नई दिल्ली
बिहार के सीतामढ़ी में पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय जवाहरनगर, सीतामढ़ी के प्रांगण में चल रहे ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’ का छठा दिन विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, राष्ट्रभक्ति और आत्मगौरव का एक अनूठा संगम साबित हुआ। इस विशेष सत्र में मुख्य संसाधक (रिसॉर्स पर्सन) संजय कुमार, रिजवाना और पवन कुमार झा ने अपनी उत्कृष्ट और इंटरैक्टिव शिक्षण शैली के माध्यम से छात्रों को भारत की अत्यंत समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध भौगोलिक स्वरूप के ऐतिहासिक सफर पर ले जाने का काम किया। सत्र के दौरान संसाधकों ने विश्व प्रसिद्ध प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के स्वर्णिम इतिहास को जीवंत करते हुए बच्चों को बताया कि कैसे यह महान केंद्र कभी वैश्विक ज्ञान और शिक्षा का सिरमौर हुआ करता था। इसके साथ ही, देश के अन्य ऐतिहासिक स्मारकों की स्थापत्य कला और उनकी सांस्कृतिक महत्ता पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिसने विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़ने और राष्ट्र के गौरवशाली अतीत को समझने के लिए प्रेरित किया।
इतिहास के इस सफर को आगे बढ़ाते हुए शिविर में भारत की प्राकृतिक और भौगोलिक अखंडता पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। संसाधकों ने देश की जीवनदायिनी नदियों, गगनचुंबी पर्वत श्रृंखलाओं और भारत की अद्वितीय प्राकृतिक विविधता को बेहद रोचक ढंग से रेखांकित किया। विद्यार्थियों ने न केवल विभिन्न नदियों और पर्वतों के नामों और उनके उद्गम को सीखा, बल्कि इनके माध्यम से भारत की भौगोलिक विविधता और पर्यावरण के महत्व को भी बखूबी समझा। इस ज्ञानवर्धक गतिविधि को लेकर छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिली।
विद्यालय के प्राचार्य पंकज अग्रवाल और प्रधानाध्यापक आर.के. रंजन ने इस सफल और दूरदर्शी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान से परे जाकर छात्रों में राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करना है। उन्होंने संयुक्त रूप से इस बात पर जोर दिया कि ऐसे भाषा शिविरों के माध्यम से जहाँ एक ओर विद्यार्थियों के भाषा कौशल और अभिव्यक्ति की क्षमता में निखार आता है, वहीं दूसरी ओर उनमें अपनी अमूल्य प्राकृतिक धरोहरों और ऐतिहासिक विरासत के प्रति गहरे सम्मान और गर्व की भावना का विकास होता है, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
