प्रणव कुमार दुबे।नई दिल्ली

बिहार के सीतामढ़ी में नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति, भाषा और लोक परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय जवाहरनगर, सुतिहारा में आयोजित हो रहा ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर 2026’ दिनों-दिन नए रंग बिखेर रहा है। शिविर के चौथे दिन का नजारा बेहद खास और अनूठा रहा, जब पूरा परिसर मिथिलांचल के सुप्रसिद्ध और पारंपरिक व्यंजनों की सोंधी खुशबू से महक उठा। इस विशेष अवसर पर मिथिला के गौरवशाली खान-पान को प्रदर्शित करती एक भव्य व्यंजन प्रदर्शनी लगाई गई, जिसके बाद सभी प्रतिभागियों और शिक्षकों के लिए एक सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में लिट्टी चोखा, दहीं-चूड़ा, तिलकोर के तरुआ, कदीमा के तरुआ, ओल की चटनी, सकरौरी और मखाने की खीर जैसे पारंपरिक व्यंजनों ने सबका मन मोह लिया। बच्चों ने न केवल इन व्यंजनों के स्वाद का आनंद लिया, बल्कि इनके इतिहास और इन्हें बनाने की विधियों के बारे में भी उत्सुकता से जानकारी हासिल की।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्राचार्य पंकज अग्रवाल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय व्यंजन और खान-पान केवल पेट भरने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, भूगोल और पहचान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने आज के फास्ट फूड के दौर में पारंपरिक भोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा पारंपरिक भोजन स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी और गुणकारी होता है, इसलिए हर बच्चे को अपनी रसोई के इन पारंपरिक हुनरों और पकवानों को बनाना जरूर सीखना चाहिए। वहीं, विद्यालय के प्रधानाध्यापक आर.के. रंजन ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्रीष्मकालीन शिविर बच्चों को उनकी अपनी माटी और जड़ों से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास कर रहा है, जिससे बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना पैदा होगी।

इस ग्रीष्मकालीन शिविर में केवल व्यंजनों का ही तड़का नहीं लग रहा, बल्कि भाषा, कला और संगीत की त्रिवेणी भी बह रही है जहाँ विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञ शिक्षक बच्चों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। शिविर में जहाँ एक ओर संगीत शिक्षक संजय कुमार बच्चों को मिथिला के पारंपरिक लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का बेहतरीन प्रशिक्षण दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षिका रिजवाना बच्चों को उर्दू भाषा की बुनियादी शिक्षा और उसकी खूबसूरत तहज़ीब से रूबरू करा रही हैं। इसके साथ ही, मैथिली शिक्षक पवन कुमार झा बच्चों को मैथिली भाषा, उसके समृद्ध साहित्य और लेखन की बारीकियों का गहन अभ्यास करा रहे हैं। भाषा और संस्कृति के इस अनूठे समागम ने बच्चों के भीतर अपनी लोक-विरासत के प्रति एक नया उत्साह और ऊर्जा भर दी है, जिससे यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा और सराहना का विषय बना हुआ है ,विद्यालय के प्राचार्य ने बच्चों के अभिभावकों धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम को समाप्त किए।

By नवप्रभा टाइम्स

*नवप्रभा टाइम्स ख़बरें की दुनिया एक भारत में विस्तार के लिए सदैव तत्पर है, बिहार व उत्तर प्रदेश से आधारित समाचार और समसामयिकी चैनल है।[1] अपने भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, और भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं पर एक अद्यतन प्रदान करता है।[2] यह सेवा ऑनलाइन और इसके मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रसारित की जाती है। यह 15 जून 2020 से सेवा प्रदान किया जा रहा है। न्यूज़ पोर्टल न्यूज़ चैनल, व राजनीतिक साक्षात्कार, सामाजिक साक्षात्कार, के माननीय दर्शक हमारे ग्राहक है।‌ हमारा कौशल विविध भारतीय भाषाओं में त्वरित गति से खबर देने के लिए सदैव गतिशील है। साप्ताहिक साक्षात्कार के साथ साथ सामाजिक सेवा प्रसारण के उद्देश्य को प्रकाशित करने हेतु हमारे चैनल सर्विस प्रदान कर रहे इस दृष्टि से यह संस्था भारतीय भाषाओं की आवाज बन रही हैं।पत्रकारीय मूल्यों के साथ-साथ लोकतंत्र को परिष्कृत करने में भी हमने यथासंभव अपनी भूमिका निभाई है। करोना काल के दिनों में मानव रक्षा के लिए समाचार की जो भूमिका रही है, वह हमारा स्वर्णिम इतिहास है। निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के चलते नवप्रभा टाइम्स समाचार सत्ता प्रतिष्ठान का कोपभाजक बनता रहा है लेकिन, हमारा लक्ष्य ‘लोकतंत्र का परिष्कार और पुरस्कार’ रहा है।* सौजन्य: नवप्रभा टाइम्स जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *