पहाड़ों पर आई जल-विनाश की भीषण आंधी से मची अफरातफरी, गंडक नदी का रौद्र रूप देखकर सहमे सीमावर्ती इलाके, अगले 72 घंटों के लिए बिहार में प्रशासनिक महकमा ‘अति-उच्च अलर्ट’ पर
प्रणव कुमार अभय
हिमालय की अत्यंत दुर्गम और बर्फीली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच नेपाल और तिब्बत की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्रकृति ने एक बार फिर ऐसा भयानक, खौफनाक और अत्यंत विनाशकारी रूप दिखाया है, जिसने नेपाल से लेकर भारत के विस्तृत मैदानी इलाकों तक की पूरी आबादी को गहरे खौफ और भारी अनहोनी की आशंका में डाल दिया है। तिब्बत सीमा के समीप अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित एक विशालकाय प्राकृतिक झील के अचानक फट जाने के कारण पूरे पर्वतीय क्षेत्र में प्रलयकारी जलप्रलय आ गया है। झील की विशाल प्राकृतिक दीवार टूटते ही पहाड़ों के ऊंचे शिखरों से अत्यधिक प्रचंड वेग के साथ निकले असीमित जलसैलाब, भारी कीचड़, बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे के भयंकर बवंडर ने नेपाल के निचले पहाड़ी व मैदानी इलाकों में तबाही का ऐसा तांडव मचाना शुरू कर दिया है, जिससे आसपास का संपूर्ण बुनियादी ढांचा पूरी तरह से छिन्न-भिन्न और तहस-नहस हो चुका है।
इस भयावह कुदरती आपदा की विभीषिका और रोंगटे खड़े कर देने वाले मंजर का अंदाजा इसी ऐतिहासिक घटना से लगाया जा सकता है कि रसुवा जिले को नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ने वाला अंतिम और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मुख्य पुल पानी के प्रचंड और अनियंत्रित बहाव के थपेड़ों को सह नहीं सका। पानी के भारी दबाव और मलबे की टक्कर से यह विशालकाय पुल ताश के पत्तों की तरह पल भर में ढहकर उफनती जलधारा में विलीन हो गया। इस एकमात्र लाइफलाइन ब्रिज के पूरी तरह ध्वस्त और पानी में समा जाने से काठमांडू का संपर्क रसुवा क्षेत्र से पूरी तरह से कट चुका है। इसके कारण राहत और बचाव अभियानों में जुटी सुरक्षा बलों, आपदा प्रबंधन टीमों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के सामने प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने, घायलों को निकालने तथा राहत सामग्री पहुंचाने की एक अत्यंत विकट और गंभीर चुनौती पैदा हो गई है। ताश के पत्तों की तरह ध्वस्त होते विशाल पुल और चारों तरफ तेजी से फैलते मटमैले जलप्रलय के रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो सामने आने के बाद पूरे नेपाल और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी अफरातफरी और दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है।
नेपाल के निवासियों के लिए यह प्राकृतिक त्रासदी इसलिए भी अधिक कष्टदायी और दुखद है क्योंकि अभी महज 72 घंटे पहले ही पूरा देश एक अन्य भीषण प्राकृतिक आपदा, मूसलाधार बारिश, उफनती नदियों और भयानक भूस्खलन के दर्दनाक झटकों से जूझ रहा था। वहां की पीड़ित जनता उस त्रासदी के गहरे जख्मों से खुद को संभालने तथा अपने उजड़े आशियानों को फिर से तिनका-तिनका जोड़कर सामान्य जीवन बहाल करने का प्रयास कर ही रही थी कि अचानक आई इस नई कुदरती विभीषिका ने हालातों को और अधिक बेकाबू, नारकीय तथा अति-विनाशकारी बना दिया है। पर्वतीय नदियों के प्रचंड उफान, तीव्र जलधाराओं और पहाड़ों से लगातार हो रहे विशाल भूस्खलन के कारण मुख्य सड़कों, संपर्क मार्गों, बिजली-संचार के बुनियादी ढांचों, पुल-पुलियों तथा स्थानीय ग्रामीण व शहरी बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। आपदा प्रभावित इलाकों में केवल लोगों की चीख-पुकार, बेबसी, तबाही और मलबे का ढेर ही दिखाई दे रहा है, जिससे प्रभावित परिवारों के सामने भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाएं और सुरक्षित आश्रय का बहुत बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो चुका है।
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में झील फटने के उपरांत उफनती नदियों और इस भयानक जलप्रलय का सीधा तथा अत्यंत खतरनाक प्रतिकूल असर अब पड़ोसी भारतीय राज्य बिहार के सीमावर्ती और मैदानी इलाकों पर बेहद तेजी से पड़ने लगा है। नेपाल की तरफ से भारी मात्रा में आ रहे पानी के प्रचंड दबाव के कारण बिहार की प्रमुख गंडक नदी सहित अन्य सहायक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से बहुत ऊपर चढ़ने लगा है, जिससे राज्य के निचले मैदानी इलाकों में एक बार फिर विनाशकारी बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। स्थिति की अत्यंत संवेदनशीलता और भयावहता को देखते हुए बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने गंडक नदी बेसिन और मैदानी क्षेत्रों के लिए अगले 72 घंटों का अति-उच्च अलर्ट घोषित कर दिया है। इसके साथ ही पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बराज से लगातार 1,02,000 क्यूसेक से भी अधिक पानी नदी में डिस्चार्ज किया जा रहा है। बराज के सभी फाटकों को पूरी तरह खोलकर जलस्तर और पानी के प्रचंड बहाव पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है।
नेपाल से आ रहे इस विशाल सैलाब और संभावित बाढ़ के महाविनाशकारी खतरे को देखते हुए बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग और राज्य सरकार ने मुख्य रूप से पश्चिमी चंपारण (बेतिया/वाल्मीकिनगर), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण (छपरा), मुजफ्फरपुर, वैशाली (हाजीपुर), सीतामढ़ी और शिवहर – इन सभी 8 अति-संवेदनशील जिलों के लिए आधिकारिक रूप से ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया है। इन सभी आठों जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, अंचलाधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमले को अगले 72 घंटों के लिए 24 घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ कार्यक्षेत्र में तैनात रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रहने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
नदी के तटीय तथा निचले इलाकों में निवास कर रहे ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा गांव-गांव में लाउडस्पीकर से माइकिंग कराकर लगातार चेतावनी दी जा रही है ताकि लोग समय रहते अपने मवेशियों, जरूरी कागजातों, राशन और सामान के साथ सुरक्षित ऊंचे स्थानों या सरकारी राहत शिविरों में चले जाएं। इसके साथ ही, उफनती गंडक नदी और उसकी सहायक नदियों में किसी भी प्रकार की जनहानि को रोकने के लिए सभी प्रकार की छोटी-बड़ी नावों के परिचालन और मछुआरों के नदी में उतरने पर पूरी तरह से प्रशासनिक रोक लगा दी गई है।
अभी कुछ ही दिनों पहले बिहार के मैदानी इलाकों में बाढ़ का पानी घटने और खतरा टल जाने से स्थानीय निवासियों ने बड़ी राहत की सांस ली थी और आम जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा था, परंतु नेपाल में झील फटने और उफनते जलप्रलय की इन नई और भयानक तस्वीरों ने एक बार फिर बिहारवासियों के दिलों में विस्थापन और तबाही का पुराना खौफ पैदा कर दिया है। स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं की विशेष टीमों, NDRF और राज्य आपदा मोचन बल की कई आधुनिक टुकड़ियों को राज्य के इन 8 संवेदनशील जिलों के सभी प्रमुख तटबंधों और बांधों पर तैनात कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारी और इंजीनियर चौबीसों घंटे तटबंधों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार का कटाव या दरार आने पर उसे त्वरित रूप से नियंत्रित किया जा सके और बिहार को एक बड़े जन-धन के नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।
