नृपेंद्र ने सात समंदर पार बसाया ””छोटा हिंदुस्तान””, छठपूजा पर गूंजते हैं छठी मइया के गीत
हाेली पर होता है धुरखेल, दिवाली पर चलते हैं पटाखे और चैत्र में होती है चैता की धूम
प्रणव कुमार अभय
अफ्रीका के एक देश टोगो में टोगो के सबसे बड़े नागरिक सम्मान “ऑनर ऑफ मोनो” से सम्मानित प्रखंड के बेलसंड गांव निवासी नृपेन्द्र तिवारी ने इस देश में एक छोटा हिंदुस्तान बना रखा है और यहां आज भारतीय संस्कृति की खुशबू रची-बसी है. इस गौरवशाली उपलब्धि के पीछे नाम आता है भारतीय मूल के दिग्गज व्यवसायी नृपेंद्र कुमार तिवारी का. दशकों पहले व्यापार के सिलसिले में टोगो गये नृपेंद्र ने न केवल अपनी व्यावसायिक सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि टोगो की धरती पर एक ऐसा वातावरण तैयार किया जिसे आज लोग प्यार से “छोटा हिंदुस्तान” कहते हैं. नृपेंद्र तिवारी ने टोगो में रहते हुए कभी अपनी जड़ों को नहीं भुलाया. उन्होंने स्थानीय स्तर पर भारतीय उत्सवों का आयोजन जैसे- दिवाली, होली और स्वतंत्रता दिवस जैसे पर्वों को टोगो में बड़े स्तर पर मनाने की परंपरा शुरू की. टोगो में रह रहे मुट्ठी भर भारतीयों को एकजुट कर एक मजबूत समुदाय बनाया, जो आज वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. नृपेन्द्र बताते हैं कि टोगो में लगता नहीं कि वे घर से दुर है, हर भारतीय त्योहारों पर कंपनी बंद रहती है और सारे स्टाफ मिलकर सभी भारतीय त्योहार खुलकर मनाते हैं.
2019 में टोगो सरकार ने दिया था सबसे बड़ा नागरिक सम्मान
नृपेंद्र मुखर्जी का योगदान केवल सांस्कृतिक ही नहीं रहा, बल्कि उन्होंने टोगो के औद्योगिक विकास में भी अमूल्य सहयोग दिया है और टोगो में ये स्टील किंग के नाम से प्रसिद्ध हैं. टोगो की अर्थव्यवस्था बढ़ाने में उनके योगदान को लेकर टोगो ने उनको सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा. उनके द्वारा स्थापित व्यवसायों ने हजारों स्थानीय तथा सैकड़ों भारतीय लोगों को रोजगार प्रदान किया, जिससे टोगो सरकार की नजर में भारत की छवि एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में उभरी.
नृपेंद्र तिवारी जिस संघर्ष के बाद यहां तक पहुंचे हैं, यह साबित करती है कि एक अकेला व्यक्ति भी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम से विदेश की धरती पर भी ””अपना देश”” बसा सकता है. आज टोगो में भारतीय समुदाय का सम्मान नृपेंद्र के उसी संघर्ष और समर्पण का फल है.
